यूट्यूबर ध्रुव राठी ने रविवार को दावा किया कि उन्हें गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया, बल्कि किडनैप किया गया था. कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले गुरुग्राम पुलिस ने उन्हें उनके घर से हिरासत में लिया था. शनिवार देर रात रिहा होने के बाद ध्रुव राठी ने वीडियो जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए. उन्होंने उन खबरों को भी खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि उन्होंने गुरुग्राम पुलिस को कोई अंडरटेकिंग दी है.
अधिकारियों के मुताबिक, ध्रुव राठी को रविवार तड़के करीब 3 बजे रिहा कर उनके परिवार को सौंप दिया गया था. उन्हें शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे गुरुग्राम के सेक्टर-56 स्थित केंद्रीय विहार सोसाइटी में उनके घर से हिरासत में लिया गया था. यह कार्रवाई मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हुई थी. बाद में पुलिस ने प्रदर्शन को रोक दिया.
‘मैं भारतीय नागरिक हूं, मेरे भी वही अधिकार हैं’
अपने वीडियो बयान में ध्रुव राठी ने भारतीय पासपोर्ट दिखाते हुए उन खबरों पर आपत्ति जताई, जिनमें उन्हें विदेशी नागरिक बताकर प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि वह भारतीय नागरिक हैं और उन्हें भी आम नागरिकों के समान अधिकार प्राप्त हैं.
ध्रुव राठी ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर की सुबह करीब 7 बजे जब वह सो रहे थे, तब उनकी मां ने दरवाजा खोला. बाहर कई लोग घूम रहे थे. उनके मुताबिक, सादे कपड़ों में करीब 20 लोग अचानक घर में घुस आए.
उन्होंने कहा, “इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाता, इन लोगों ने सचमुच मुझे किडनैप कर लिया. मैं यहां किडनैप शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं, क्योंकि यह गिरफ्तारी नहीं है.”
ध्रुव राठी ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना नेमप्लेट वाले लोगों ने जबरन घर से बाहर निकाला और सीढ़ियों से नीचे ले गए. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान उनके शरीर पर चोटें आईं. हालांकि, ये आरोप उनके वीडियो बयान पर आधारित हैं.
वकील से मिलने नहीं देने का भी आरोप
ध्रुव राठी ने आरोप लगाया कि उन्हें अपने वकील से मिलने का मौका भी नहीं दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि किसी ऐसे नागरिक को, जिसने उनके मुताबिक कोई कानून नहीं तोड़ा, उसके घर से इस तरह कैसे ले जाया जा सकता है.
उन्होंने इस कार्रवाई को ‘अनौपचारिक आपातकाल’ बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर देश को तानाशाही की ओर ले जाने का आरोप लगाया. ध्रुव राठी ने कहा कि अगर उनके साथ ऐसा हो सकता है, तो दूसरे नागरिकों के साथ भी ऐसा हो सकता है.
उन्होंने हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग को लेकर भूख हड़ताल की चेतावनी देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का आभार भी जताया. ध्रुव राठी ने कहा कि वह देश के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते रहेंगे.
सीजेपी के तीन नेता भी रिहा
सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को भी रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया. तीनों को शनिवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिया गया था.
सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों नेताओं को एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर रिहा किया गया.
दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिरासत की कार्रवाई
सीजेपी के प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने के लिए शनिवार को दिल्ली में बड़े स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. खबर के मुताबिक, अलग-अलग स्थानों पर 7,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, ताकि वे जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच सकें.
ध्रुव राठी ने अपनी रिहाई के बाद पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं. हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस के पक्ष के बीच स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी.


