ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं. इस बार उनका एक बयान युवाओं के बीच रिश्तों, प्यार और शादी को लेकर सुर्खियों में है. एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ओवैसी ने युवाओं से कहा कि अगर वे किसी से प्यार करते हैं, तो पहले उससे शादी करें और उसके बाद अपने प्यार का इजहार करें.
पार्टी की ओर से सोमवार को साझा किए गए वीडियो में ओवैसी कहते सुनाई दिए, “हम हर तकरीर में लोगों से कहते हैं कि अपनी बीवियों को ‘I Love You’ कहो. नौजवानों! अगर किसी से मोहब्बत करते हो, तो उससे शादी करो और फिर ‘I Love You’ कहो. जब आपकी शादी हो जाती है, तो आपका आधा ईमान पूरा हो जाता है.”
‘पहले सेटल होने का इंतजार मत करो’
ओवैसी ने एक राजनेता के घर जाने का किस्सा भी सुनाया. उन्होंने बताया कि वहां उन्होंने राजनेता के बेटे को शादी करने की सलाह दी थी. इस पर युवक ने जवाब दिया कि पहले उसे अपनी जिंदगी में सेटल होना है.
युवक की इस बात पर ओवैसी ने मजाकिया अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि वह खुद भी अभी तक सेटल नहीं हुए हैं, जबकि उनकी दाढ़ी सफेद हो चुकी है. उन्होंने कहा कि पहले सेटल होने का इंतजार करने के बजाय शादी कर लेनी चाहिए, इसके बाद चीजें अपने आप ठीक होने लगेंगी. ओवैसी की इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोग हंसने लगे.
पीएम मोदी पर भी साधा निशाना?
अपने संबोधन के आखिर में ओवैसी ने बिना नाम लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी तंज कसा. उन्होंने कहा, “जिनके घर में कोई नहीं होता, वे दूसरों को परेशान करते हैं… आप देख रहे हैं न? समझ रहे हैं?”
उनके इस बयान को प्रधानमंत्री मोदी पर अप्रत्यक्ष कटाक्ष के तौर पर देखा जा रहा है.
UCC और समलैंगिक विवाह पर भी रख चुके हैं राय
ओवैसी शादी और रिश्तों के अलावा विवाह कानूनों तथा धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी राय रखते रहे हैं. वह प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) के मुखर विरोधियों में शामिल हैं. उनका तर्क है कि समान नागरिक संहिता के नाम पर देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता प्रभावित हो सकती है.
ओवैसी ने यह सवाल भी उठाया है कि जब कुछ समुदायों को विशेष छूट मिलती है और अलग-अलग प्रावधान मौजूद हैं, तो ऐसी संहिता वास्तव में कितनी समान होगी.
समलैंगिक विवाह के मुद्दे पर भी ओवैसी अपना रुख स्पष्ट कर चुके हैं. अक्टूबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने इस विषय पर कानून बनाने का अधिकार संसद के पास रहने का समर्थन किया था. उनका मानना है कि विवाह पुरुष और महिला के बीच होना चाहिए तथा समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने के सवाल पर फैसला विधायिका को करना चाहिए.


