चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) का शेड्यूल जारी किया है. वहीं, कई जगह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया भी चर्चा में है. जानिए दोनों में क्या फर्क है और आम वोटर को क्या करना चाहिए.
SSR क्या होता है?
SSR यानी स्पेशल समरी रिवीजन, वोटर लिस्ट को अपडेट करने की प्रक्रिया है. इसमें मौजूदा मतदाता सूची को आधार बनाकर नए योग्य वोटरों के नाम जोड़े जाते हैं और रिकॉर्ड में मौजूद गलतियों को सुधारा जाता है.
इस प्रक्रिया में इन बातों की जांच हो सकती है:
18 साल की उम्र पूरी कर चुके योग्य नागरिकों का नाम जोड़ना.
वोटर के नाम, पते या अन्य जानकारी में गलती सुधारना.
मृत या स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच करना.
एक ही व्यक्ति के नाम की दोहरी एंट्री की पहचान करना.
इसमें बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की अहम भूमिका होती है. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद नागरिक अपना नाम और जानकारी जांच सकते हैं और जरूरत के मुताबिक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं.
SSR में कौन-से फॉर्म भरने होते हैं?
Form 6: वोटर लिस्ट में नया नाम जुड़वाने के लिए.
Form 6A: विदेश में रहने वाले पात्र भारतीय नागरिकों के ओवरसीज इलेक्टर के रूप में पंजीकरण के लिए.
Form 7: किसी नाम को शामिल किए जाने पर आपत्ति या नाम हटाने के अनुरोध के लिए.
Form 8: नाम, पता या अन्य विवरण में सुधार और निर्धारित बदलावों के लिए.
कौन-सा फॉर्म भरना है, यह आपकी जरूरत पर निर्भर करता है.
SSR का पूरा शेड्यूल
चुनाव आयोग के 15 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक, SSR की प्रमुख तारीखें इस प्रकार हैं:
12 नवंबर 2026: ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होगी.
12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026: दावे और आपत्तियां दर्ज करने का समय.
28 दिसंबर 2026 तक: दावों और आपत्तियों का निपटारा.
4 जनवरी 2027: फाइनल वोटर लिस्ट प्रकाशित होने की तारीख.
इस प्रक्रिया में 1 जनवरी 2027 को पात्रता की मुख्य तारीख माना गया है. इसके अलावा, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर 2027 को 18 साल की उम्र पूरी करने वाले पात्र नागरिकों के अग्रिम आवेदन भी लिए जाने हैं.
SIR क्या है?
SIR का पूरा नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन है. यह वोटर लिस्ट की ज्यादा विस्तृत जांच और सत्यापन की प्रक्रिया है. इसमें BLO घर-घर जाकर मतदाताओं तक गणना फॉर्म पहुंचाते हैं. फॉर्म जमा होने के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तैयार की जाती है और फिर दावे तथा आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया जाता है.
SSR में मुख्य रूप से मौजूदा वोटर लिस्ट को अपडेट किया जाता है, जबकि SIR में मतदाताओं की जानकारी का व्यापक सत्यापन किया जाता है. हालांकि, SIR में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी और कौन-से दस्तावेज मांगे जा सकते हैं, यह चुनाव आयोग के संबंधित निर्देशों पर निर्भर करता है.
SIR में 2002–04 की वोटर लिस्ट का क्या महत्व है?
कुछ राज्यों में SIR के दौरान पुरानी वोटर लिस्ट को संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. चुनाव आयोग के पोर्टल पर 2002 या 2003 की वोटर लिस्ट भी उपलब्ध है. लेकिन यह मानना सही नहीं होगा कि हर राज्य में हर वोटर को अनिवार्य रूप से 2002–04 की सूची में अपना नाम दिखाना ही होगा. संबंधित राज्य में लागू SIR के आधिकारिक निर्देशों के मुताबिक ही सत्यापन और दस्तावेजों की जरूरत तय होती है.
आम वोटर को क्या करना चाहिए?
अगर आपके क्षेत्र में SSR चल रहा है, तो ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद अपना नाम, पता और अन्य जानकारी जरूर जांचें. नाम छूटने या किसी गलती की स्थिति में तय समय के भीतर संबंधित फॉर्म भरें.
अगर आपके क्षेत्र में SIR चल रहा है, तो BLO और चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार गणना फॉर्म तथा सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करें. केवल यह मानकर न चलें कि पुरानी वोटर लिस्ट में नाम होने से नई सूची में भी नाम अपने आप बना रहेगा.
दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अपडेट रखना है, लेकिन तरीका अलग है. इसलिए अपने क्षेत्र में लागू प्रक्रिया और उसकी समयसीमा की जानकारी रखना जरूरी है.


