भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने सितंबर और अक्टूबर 2026 में मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रियाओं और अपने कामकाज में कई बदलाव किए हैं. इनका मकसद वोटर रजिस्ट्रेशन, नाम हटाने की शिकायतों और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाना है. आयोग ने 26 सितंबर की बैठक में SIR के दौरान नोटिस पाने वाले मतदाताओं की सुनवाई को आसान बनाने सहित कई फैसले लिए. वहीं, 15 अक्टूबर को 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) कराने की घोषणा की गई.
1. चुनाव आयोग की बैठकों और कामकाज के नियमों में बदलाव
26 सितंबर की बैठक में आयोग ने अपने आंतरिक कामकाज से जुड़े कई निर्देश जारी किए. अब बैठकों में चर्चा के मुद्दों की जानकारी पहले से साझा करने, चर्चा और फैसलों का लिखित रिकॉर्ड रखने और अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के पालन पर जोर दिया गया है. अधिकारियों की विदेश यात्रा और वोटर लिस्ट से जुड़े नए आईटी सिस्टम व पोर्टल शुरू करने के लिए भी आयोग की मंजूरी और समीक्षा की व्यवस्था तय की गई है.
2. नए वोटर के Form 6 में बदलाव
नया वोटर बनने के लिए Form 6 भरा जाता है. जुलाई में ऑनलाइन फॉर्म में पिछली SIR वोटर लिस्ट में आवेदक या उसके रिश्तेदार का नाम होने से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी. 26 सितंबर को आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR की प्रक्रिया के दौरान लागू व्यवस्था से अलग, सामान्य समय में वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए निर्धारित नियमों वाला फॉर्म इस्तेमाल किया जाएगा. जिन राज्यों में SIR पूरी हो चुकी थी, वहां ऑनलाइन Form 6 से अतिरिक्त घोषणा हटाने की जानकारी सामने आई.
3. Form 7 से नाम हटाने की शिकायतों पर सीमा
वोटर लिस्ट से किसी का नाम हटाने की मांग के लिए Form 7 इस्तेमाल किया जाता है. 9 अक्टूबर के निर्देशों के मुताबिक, दावे और आपत्तियां दर्ज करने की निर्धारित अवधि में एक व्यक्ति अधिकतम 10 Form 7 भर सकता है. वहीं, वोटर लिस्ट में नियमित बदलाव की अवधि के दौरान एक महीने में अधिकतम 5 फॉर्म भरने की सीमा तय की गई है.
शिकायतकर्ता को अधिकारियों के सामने खुद उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराना होगा. जिस मतदाता का नाम हटाने की मांग की गई है, उसे भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा. इन नियमों का उद्देश्य नाम हटाने से जुड़ी शिकायतों की जांच और सुनवाई को अधिक व्यवस्थित बनाना है.
4. SIR का नोटिस मिलने पर आसान होगी प्रक्रिया
SIR के दौरान जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में अंतर या दस्तावेजों से जुड़ी विसंगतियां मिलीं, उन्हें नोटिस भेजे गए थे. अब ऐसे मामलों में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) संबंधित मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज एकत्र कर सकता है और उन्हें ECINet सिस्टम पर अपलोड करेगा. इसके बाद इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) दस्तावेजों की जांच कर फैसला लेंगे.
मतदाताओं को सामान्य तौर पर सुनवाई के लिए बार-बार अधिकारी के कार्यालय जाने की जरूरत नहीं होगी. सुनवाई केवल विशेष परिस्थितियों में होगी और जहां संभव होगा, उसे ऑनलाइन कराया जाएगा. जरूरत पड़ने पर मतदाता की अनुमति से परिवार का कोई वयस्क सदस्य भी उसकी ओर से सुनवाई में शामिल हो सकता है.
5. वोटर लिस्ट से छूटे पात्र लोगों के लिए विशेष अभियान
चुनाव आयोग ने 1 अक्टूबर को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया कि SIR के बाद सूची से छूट गए पात्र मतदाताओं की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाया जाए.
इसके तहत BLO मौजूदा वोटर लिस्ट की तुलना पुरानी सूची से करेंगे और जिन पात्र लोगों के नाम नई सूची में नहीं मिलेंगे, उनसे संपर्क करेंगे. यदि कोई व्यक्ति वोटर बनने की योग्यता रखता है, लेकिन उसका नाम सूची में नहीं है, तो उसे Form 6 भरने में सहायता दी जाएगी.
6. 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट की समीक्षा
15 अक्टूबर को चुनाव आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल समरी रिवीजन (SSR) कराने की घोषणा की. इसके लिए 1 जनवरी 2027 को पात्रता की तारीख तय की गई है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, मौजूदा रिकॉर्ड में गलतियां सुधारना और मतदाता सूची को अपडेट करना है.
SIR और SSR में क्या अंतर है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन में मतदाता सूची की गहन जांच और व्यापक पुनरीक्षण किया जाता है. वहीं, SSR में मौजूदा मतदाता सूची को आधार बनाकर नए पात्र मतदाताओं को शामिल करने, गलतियां सुधारने और दावे-आपत्तियों के जरिए रिकॉर्ड अपडेट करने पर ध्यान दिया जाता है. जिन राज्यों में SIR जारी है या हाल में पूरी हुई है, वहां के लिए अलग कार्यक्रम जारी किया जाना है.
7. वोटर लिस्ट की PDF अब होगी ज्यादा उपयोगी
चुनाव आयोग ने निर्देश दिया है कि मतदाता सूची का ड्राफ्ट और अंतिम संस्करण मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को ऐसी PDF फाइल में दिया जाए, जिसमें टेक्स्ट को आसानी से पढ़ा और सर्च किया जा सके. इन PDF में मतदाताओं की तस्वीरें नहीं होंगी.
इसके अलावा, ड्राफ्ट सूची जारी करते समय नाम जोड़े जाने, हटाए जाने या विवरण में बदलाव की अलग सूची भी राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई जाएगी. इससे नाम खोजना और डेटा का विश्लेषण करना पहले के मुकाबले आसान हो सकता है.
8. दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR की समय-सीमा में बदलाव
26 सितंबर के फैसलों के तहत दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR से जुड़ी कुछ समय-सीमाओं में बदलाव किया गया. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 और उनके निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर 2026 तय की गई थी.
महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तारीख 26 अक्टूबर 2026, उनके निपटारे की तारीख 10 नवंबर 2026 और अंतिम मतदाता सूची जारी करने की तारीख 16 नवंबर 2026 बताई गई है. इन तारीखों को प्रकाशित करने से पहले संबंधित राज्य के आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम से मिलान करना जरूरी है.
आम वोटर पर क्या पड़ेगा असर?
इन बदलावों का असर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, नाम हटाने की शिकायत करने और SIR के दौरान दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है. नाम हटाने की शिकायतों की संख्या पर सीमा तय होने से बार-बार शिकायत दर्ज करने पर नियंत्रण लगेगा. नोटिस पाने वाले मतदाताओं को दस्तावेज जमा करने के लिए घर पर सुविधा मिलने से कार्यालयों के चक्कर कम हो सकते हैं.
वहीं, विशेष अभियान के जरिए सूची से छूटे पात्र लोगों को दोबारा नाम जुड़वाने में मदद मिलेगी. सर्च की जा सकने वाली PDF से राजनीतिक दलों को मतदाता सूची में हुए बदलावों का विश्लेषण करने में भी आसानी होगी. हालांकि, अपने नाम की स्थिति जानने के लिए मतदाताओं को आधिकारिक चुनाव आयोग पोर्टल पर सूची की जांच करते रहना चाहिए.


