उत्तर प्रदेश में किराएदारों और मकान मालिकों के लिए रेंट एग्रीमेंट से जुड़ा नया प्रस्ताव चर्चा में है. सरकार सालाना 2 लाख रुपये तक के किराए वाले समझौतों पर 1,000 रुपये की स्टांप ड्यूटी लागू करने की योजना बना रही है. इससे रेंट एग्रीमेंट बनवाने का खर्च कम हो सकता है और अधिक लोगों को लिखित व रजिस्टर्ड समझौते के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है. हालांकि, प्रस्ताव के अंतिम नियम और लागू होने की तारीख की पुष्टि होना बाकी है.
11 महीने का ही क्यों बनता है रेंट एग्रीमेंट?
देश में ज्यादातर किराए के मकानों के लिए 11 महीने का रेंट एग्रीमेंट बनाया जाता है. इसकी एक बड़ी वजह रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियम और खर्च हैं. आमतौर पर एक साल से कम अवधि के लीज एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं होता, जबकि एक साल या उससे अधिक अवधि की कई लीज के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है.
इसी वजह से मकान मालिक और किराएदार अक्सर 11 महीने का समझौता करते हैं. हालांकि, एग्रीमेंट की अवधि के अलावा उसकी शर्तों और लागू कानूनों के आधार पर भी नियम तय होते हैं.
1,000 रुपये की स्टांप ड्यूटी का क्या है प्रस्ताव?
स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन शुल्क राज्यमंत्री रवींद्र जायसवाल के बयान के मुताबिक, सरकार सालाना 2 लाख रुपये तक के किराए वाले समझौतों के लिए 1,000 रुपये की स्टांप ड्यूटी लागू करने की योजना बना रही है. इसका उद्देश्य रेंट एग्रीमेंट बनवाने और उसका रजिस्ट्रेशन कराने की प्रक्रिया को आसान बनाना है.
प्रस्ताव लागू होने पर कम किराए वाले मकानों के लिए एग्रीमेंट बनवाने का खर्च कम हो सकता है. हालांकि, अंतिम अधिसूचना जारी होने तक इसे लागू नियम नहीं माना जाना चाहिए.
किराएदारों को क्या होगा फायदा?
- कानूनी सुरक्षा: रजिस्टर्ड एग्रीमेंट किराए और रहने की अवधि का लिखित प्रमाण देगा.
- किराए का विवाद: मकान मालिक और किराएदार के बीच किराया बढ़ाने या दूसरी शर्तों को लेकर विवाद होने पर समझौता मददगार हो सकता है.
- मकान खाली करने की शर्तें: एग्रीमेंट में नोटिस अवधि और मकान खाली करने से जुड़ी शर्तें स्पष्ट रखी जा सकती हैं.
मकान मालिकों को भी मिलेगी राहत
मकान मालिकों के लिए भी लिखित समझौता उपयोगी होगा. इसमें किराए की राशि, भुगतान की तारीख, सिक्योरिटी डिपॉजिट और मकान खाली करने की शर्तें दर्ज की जा सकती हैं. किराया न मिलने या समझौते की शर्तों का पालन नहीं होने पर यह दस्तावेज विवाद सुलझाने में मदद कर सकता है.
क्या अब 11 महीने का एग्रीमेंट बनवाना जरूरी नहीं होगा?
प्रस्तावित बदलाव का मतलब यह नहीं है कि 11 महीने के रेंट एग्रीमेंट पर रोक लग जाएगी. इसका मुख्य उद्देश्य स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना बताया जा रहा है. किराएदार और मकान मालिक अपनी जरूरत के अनुसार एग्रीमेंट की अवधि तय कर सकते हैं, लेकिन रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता लागू कानूनों और समझौते की शर्तों पर निर्भर करेगी.


