जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को हटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने शनिवार तड़के विशेष रणनीति बनाई थी. सूत्रों के मुताबिक, सुबह करीब 3 बजे नई दिल्ली जिले के सभी पुलिसकर्मियों को संसद की सुरक्षा ड्रिल के नाम पर बुलाया गया। बाद में उन्हें मंदिर मार्ग थाने ले जाकर बताया गया कि वांगचुक को सिर्फ 30 सेकेंड के भीतर प्रदर्शन स्थल से हटाना है.
फोन जैमर लगाया, सफेद पर्दे की आड़ में हटाया
सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई से कुछ मिनट पहले जंतर-मंतर इलाके में फोन जैमर लगाया गया. सुबह करीब 6:30 बजे पुलिस ने मंच के सामने सफेद पर्दा लगा दिया और कुछ ही सेकेंड में सोनम वांगचुक को एंबुलेंस के जरिए सफदरजंग अस्पताल पहुंचा दिया। बताया गया कि पूरी कार्रवाई पर्दे की आड़ में की गई ताकि मौके पर मौजूद लोग उसे देख न सकें.
अभिजीत दिपके के बाहर जाने का किया इंतजार
सूत्रों का दावा है कि पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों की दिनचर्या का अध्ययन किया. योजना के तहत CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके के शौचालय जाने का इंतजार किया गया और उसी दौरान वांगचुक को हटाने की कार्रवाई की गई। इसके बाद पुलिस ने अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हटाना शुरू कर दिया और दिपके को भी रोक लिया.
पुलिस कमिश्नर बदलने के अगले दिन हुई कार्रवाई
वांगचुक को हटाने की कार्रवाई ऐसे समय हुई जब इससे एक दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा को हटाकर अनुराग कुमार को नया पुलिस आयुक्त नियुक्त किया था. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नए पुलिस आयुक्त ने कार्यभार संभालने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर इस कार्रवाई की रणनीति तैयार की.
विपक्ष ने उठाए सवाल
सोनम वांगचुक 28 जून से परीक्षा प्रणाली में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे. उनकी गिरफ्तारी और अस्पताल ले जाने की कार्रवाई के बाद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए वांगचुक की मांगों पर बातचीत की अपील की है.


