कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने शिक्षा मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जरूर की थी, लेकिन उनकी जगह प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति का समर्थन नहीं करती।
‘प्रह्लाद जोशी की नियुक्ति का समर्थन नहीं’
अभिजीत दिपके ने कहा कि प्रह्लाद जोशी पहले बिलकिस बानो मामले के दोषियों का माला पहनाकर स्वागत करते नजर आए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाए जाने से स्कूल जाने वाली छात्राएं खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेंगी।
उन्होंने कहा, “हमने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी, लेकिन उनकी जगह प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्री बनाया गया। हम इसका समर्थन नहीं करते।”
फिर आंदोलन की दी चेतावनी
दिपके ने कहा कि अगर CJP की बाकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो पार्टी दोबारा धरना-प्रदर्शन करेगी।
उन्होंने कहा कि पार्टी ने NEET-UG पेपर लीक से जुड़े कथित आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की थी, लेकिन अब तक किसी भी परिवार को यह राशि नहीं मिली है।
दिपके ने आरोप लगाया कि सरकार मुआवजे के मामले में नियमों का हवाला दे रही है, जबकि अन्य मामलों में करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं।
नेपाल और बांग्लादेश से तुलना पर भी जताई आपत्ति
अभिजीत दिपके ने CJP के आंदोलन की तुलना नेपाल और बांग्लादेश के छात्र आंदोलनों से किए जाने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का आंदोलन पूरी तरह अलग है और ऐसी तुलना केवल CJP की छवि खराब करने के लिए की जा रही है।
उन्होंने यह प्रतिक्रिया बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन की उस टिप्पणी पर दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि CJP के आंदोलन की कुछ झलकियां उन्हें 2024 के बांग्लादेश छात्र आंदोलन की याद दिलाती हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने दिया था इस्तीफा
गौरतलब है कि NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जंतर-मंतर पर CJP के एक महीने से अधिक समय तक चले आंदोलन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया।


