नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR), हैदराबाद के 2026 में लॉ की डिग्री पूरी करने वाले छात्रों के एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट पर रोक लगा दी गई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने अगले आदेश तक किसी भी स्टेट बार काउंसिल को NALSAR के 2026 बैच के छात्रों का एडवोकेट एनरोलमेंट नहीं करने का निर्देश दिया है।
CJI को दी गई Convocation की दावत के बाद विवाद
यह मामला NALSAR के दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, NALSAR के एक वर्ग के छात्रों ने CJI सूर्यकांत को समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया था।
इसके बाद विवाद बढ़ा और अब BCI ने 2026 में लॉ की डिग्री हासिल करने वाले छात्रों के एनरोलमेंट को अगले आदेश तक रोक दिया है।
BCI ने NALSAR के VC से मांगी रिपोर्ट
BCI ने NALSAR के वाइस चांसलर से पूरे मामले पर रिपोर्ट भी मांगी है। BCI एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य एडवोकेट वीपी शर्मा ने बताया कि यह फैसला कमेटी की मंजूरी के बाद लिया गया है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल विश्वविद्यालय से सिर्फ रिपोर्ट मांगी गई है। अगर जांच में छात्रों की ओर से किसी तरह की अनुशासनहीनता नहीं पाई जाती है, तो एनरोलमेंट की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
छात्रों के करियर पर पड़ सकता है असर
बार काउंसिल में एनरोलमेंट कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बाद ही वे बतौर एडवोकेट प्रैक्टिस कर सकते हैं। ऐसे में BCI के फैसले से NALSAR के 2026 बैच के उन छात्रों की पेशेवर शुरुआत प्रभावित हो सकती है, जिन्होंने नौकरी या लीगल प्रैक्टिस की तैयारी कर रखी है।
हालांकि BCI ने संकेत दिया है कि अगर जांच में अनुशासनहीनता नहीं पाई जाती है तो एनरोलमेंट पर लगी रोक हटाई जा सकती है।
BCI के फैसले को चुनौती देने का विकल्प
BCI सदस्य वीपी शर्मा ने कहा कि अगर कोई इस फैसले को चुनौती देना चाहता है तो वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र है। फिलहाल NALSAR से रिपोर्ट मिलने और मामले की जांच पूरी होने तक 2026 बैच के छात्रों का एडवोकेट एनरोलमेंट रुका रहेगा।


