भारतीय सिनेमा ने अपने एक बेहद दमदार और अलग अंदाज वाले कलाकार को खो दिया। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर को 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा स्थित उनके घर पर उन्हें बेहोशी की हालत में पाया गया था। इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका। अस्पताल के मुताबिक उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट के बाद हुई।
नाना पाटेकर की जिंदगी सिर्फ फिल्मों में निभाए गए किरदारों की कहानी नहीं थी। उनका वास्तविक जीवन भी संघर्ष, गरीबी, मेहनत और सादगी से भरा रहा। बिना किसी बड़े फिल्मी कनेक्शन के उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर हिंदी और मराठी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।
13 साल की उम्र से शुरू हुआ संघर्ष
नाना पाटेकर ने बहुत कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था। स्कूल में पढ़ाई के दौरान वह मुंबई के चुनाभट्टी इलाके में फिल्मी पोस्टर पेंट करने जाते थे। इसके लिए उन्हें महीने के करीब 35 रुपये मिलते थे। कई बार उन्हें स्कूल के बाद करीब 8 किलोमीटर पैदल चलकर काम पर जाना पड़ता था।
परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद खराब दौर से गुजरी। उनके पिता की संपत्ति जाने के बाद घर की हालत बिगड़ गई थी। बचपन में देखी गरीबी और भूख ने नाना की सोच पर गहरा प्रभाव डाला। यही अनुभव आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और पैसे को लेकर नजरिए में भी दिखाई दिया।
‘गमन’ से बॉलीवुड तक का सफर
नाना पाटेकर ने 1978 में आई फिल्म ‘गमन’ से फिल्मी दुनिया में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘अब तक छप्पन’, ‘वेलकम’ और ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं।
उनकी आवाज, संवाद अदायगी और किरदारों को जीवंत करने का अंदाज इतना अलग था कि वह धीरे-धीरे भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में शामिल हो गए। उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला और उन्हें कई बड़े पुरस्कारों से नवाजा गया।
करोड़ों की कमाई, लेकिन जिंदगी में सादगी
करियर के शुरुआती संघर्ष से निकलकर नाना पाटेकर ने खूब सफलता और पैसा कमाया। मीडिया रिपोर्ट्स में उनके करियर के बाद के दौर में एक फिल्म की फीस करीब 2 से 3 करोड़ रुपये तक बताई जाती रही है। उनकी कुल संपत्ति को लेकर भी अलग-अलग अनुमान सामने आते रहे हैं और कई रिपोर्ट्स में इसे करीब 60 से 80 करोड़ रुपये के बीच बताया गया है।
हालांकि, इतनी संपत्ति होने के बावजूद नाना का रहन-सहन दूसरे बड़े बॉलीवुड सितारों की तरह बेहद आलीशान नहीं था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुंबई के अंधेरी में उनका करीब 750 वर्गफुट का एक बेडरूम वाला फ्लैट था। बताया जाता है कि इसे उन्होंने कई दशक पहले करीब 1.1 लाख रुपये में खरीदा था और आज इसकी कीमत करोड़ों में बताई जाती है।
गोवा में भी उनका घर था। इसके अलावा पुणे के खड़कवासला के पास उनके फार्महाउस का भी जिक्र मिलता रहा है, जहां वह खेती से जुड़े काम करते थे।
कारों का शौक भी रहा बेहद साधारण
नाना पाटेकर का कार कलेक्शन भी उनकी सादगी वाली छवि से अलग नहीं था। उनके पास Mahindra Jeep CJ4, Mahindra Scorpio और Audi Q7 जैसी गाड़ियां होने की रिपोर्ट्स सामने आती रही हैं।
उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने करीब 1.5 करोड़ रुपये की लग्जरी कार खरीदने से इनकार कर दिया था। उनका मानना था कि इतने पैसे का इस्तेमाल किसानों की मदद के लिए किया जा सकता है।
नाना पाटेकर की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने गरीबी से निकलकर करोड़ों की संपत्ति और देशभर में पहचान बनाई, लेकिन सफलता के बाद भी अपने जीवन का सादा अंदाज नहीं बदला। शायद यही वजह है कि फिल्मों के किरदारों के साथ-साथ उनकी असल जिंदगी भी लोगों के लिए हमेशा प्रेरणा बनी रहेगी।


