बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है. बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक दोबारा नियुक्त कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय हुआ है, जब कुछ ही दिन पहले आकाश को पार्टी से अलग कर उनके छोटे भाई ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी गई थी.
मायावती ने 5 अक्टूबर को सोशल मीडिया के जरिए आकाश की पार्टी में वापसी का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि पार्टी और मूवमेंट के हित में काफी सोच-विचार के बाद आकाश को फिर से काम करने का मौका दिया जा रहा है.
आकाश ने मांगी थी वापसी की अनुमति
मायावती ने अपने बयान में आकाश के हालिया सोशल मीडिया पोस्ट का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आकाश ने पार्टी में दोबारा काम करने का अनुरोध किया था. मायावती के मुताबिक, पार्टी के अधिकांश लोगों की राय थी कि उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए उन्हें पहले दी गई जिम्मेदारियों के साथ दोबारा काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए.
मायावती ने आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इसके बाद आकाश के व्यक्तित्व और कार्यशैली में बदलाव देखने को मिला है.
ईशान आनंद का क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब आकाश आनंद को दोबारा राष्ट्रीय संयोजक बना दिया गया है तो उनके छोटे भाई ईशान आनंद की भूमिका क्या होगी.
दरअसल, 23 सितंबर को ही मायावती ने ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया था. उस समय आकाश को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद ईशान को संगठन में अहम जिम्मेदारी दी गई थी.
लेकिन अब आकाश की वापसी के साथ ईशान के पास राष्ट्रीय संयोजक का पद नहीं रहेगा. मायावती ने अपने बयान में ईशान के लिए स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी पद के भी पार्टी में काम करने की इच्छा जताई है.
मायावती के मुताबिक, ईशान ने कहा है कि उन्हें पार्टी में कोई पद मिले या न मिले, वह बहनजी के दिशा-निर्देशन में जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी, उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाएंगे.
मायावती ने ईशान और आकाश दोनों को दिया आशीर्वाद
बसपा प्रमुख ने आकाश की दोबारा नियुक्ति के साथ ईशान और उनके पिता आनंद कुमार का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आकाश की वापसी के फैसले पर आनंद कुमार और ईशान आनंद ने अपनी सहमति जताई थी.
मायावती ने आकाश, ईशान और आनंद कुमार को अपना प्यार और आशीर्वाद भी दिया. उन्होंने उम्मीद जताई कि अब पार्टी संगठन में सब कुछ सुचारू रूप से चलेगा और बार-बार संगठनात्मक बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि काफी कुछ आकाश आनंद पर निर्भर करेगा.
एक महीने में बदला पूरा समीकरण
बसपा में पिछले करीब एक महीने में नेतृत्व को लेकर कई बड़े बदलाव हुए हैं. 3 सितंबर को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटाया गया और 10 सितंबर को उन्हें पार्टी से अलग कर दिया गया था. इसके बाद 23 सितंबर को ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया.
अब महज 13 दिन बाद 5 अक्टूबर को आकाश आनंद की पार्टी में वापसी हो गई और उन्हें फिर से राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी सौंप दी गई.
आकाश की वापसी ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बसपा भी अपने संगठन और चुनावी तैयारियों पर फोकस कर रही है.


