उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी की रणनीति पर नई चर्चा शुरू हो गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद माना जा रहा है कि पार्टी तीसरी राज्यसभा सीट के लिए उम्मीदवार उतारने से पीछे हट सकती है. अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है.” उनके इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है.
यूपी में 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है. मौजूदा गणित के मुताबिक, एक सीट जीतने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत है. विधानसभा की प्रभावी संख्या फिलहाल 396 बताई जा रही है.
समाजवादी पार्टी के पास 98 विधायक हैं. जेल में बंद विधायक रमाकांत यादव को अगर मतदान की अनुमति नहीं मिलती है तो सपा के वोटों की संख्या 97 हो सकती है. वहीं, कांग्रेस के दो विधायकों का समर्थन मिलने पर यह संख्या 99 तक पहुंच सकती है.
इस गणित के आधार पर सपा दो राज्यसभा सीटों के लिए जरूरी 74 वोट आसानी से जुटा सकती है.
तीसरी सीट के लिए 111 वोट की जरूरत
अगर सपा तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो तीनों सीटें जीतने के लिए करीब 111 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत होगी. दो उम्मीदवारों को जिताने के बाद सपा के पास करीब 25 वोट बचेंगे. ऐसे में तीसरी सीट के लिए उसे कम से कम 12 और विधायकों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है.
इसी अतिरिक्त संख्या को जुटाने के लिए सपा की नजर विपक्षी और तटस्थ विधायकों पर थी. सुभासपा के तीन ऐसे विधायकों से समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी, जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि सपा से जुड़ी रही है. इसके अलावा सपा के कुछ बागी विधायकों की वापसी और आरएलडी, अपना दल समेत अन्य गैर-बीजेपी विधायकों के रुख पर भी नजर थी.
अखिलेश पहले भी रख चुके हैं शर्त
अखिलेश यादव पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि सपा तीसरा उम्मीदवार तभी उतारेगी, जब उसके पास चुनाव जीतने के लिए जरूरी संख्या होगी. ऐसे में अब उनका ‘तीन नहीं, 403’ वाला पोस्ट कई तरह के राजनीतिक संकेत दे रहा है.
हालांकि, सपा की ओर से तीसरे उम्मीदवार को लेकर अभी औपचारिक घोषणा नहीं की गई है. इसलिए इसे फिलहाल पार्टी की रणनीति का संकेत माना जा रहा है.
2027 विधानसभा चुनाव पर फोकस?
अखिलेश यादव के पोस्ट का दूसरा बड़ा संकेत 2027 के विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. उत्तर प्रदेश में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं और अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं.
ऐसे में अगर सपा तीसरी राज्यसभा सीट की कोशिश से पीछे हटती है तो पार्टी का फोकस अब राज्यसभा के बजाय विधानसभा चुनाव की रणनीति, संगठन और 403 सीटों के समीकरण पर केंद्रित होने की संभावना है.


