दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह को छह महिला पहलवानों द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में बरी कर दिया। अदालत के इस फैसले के साथ भारतीय खेल जगत के सबसे चर्चित मामलों में से एक का फिलहाल कानूनी अंत हो गया।
2023 में शुरू हुआ था विवाद
यह मामला वर्ष 2023 में सामने आया था, जब ओलंपियन विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया समेत कई शीर्ष पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते हुए बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। पहलवानों ने उनकी गिरफ्तारी और WFI अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की थी।
छह महिला पहलवानों ने दर्ज कराई थी शिकायत
बाद में छह वयस्क महिला पहलवानों ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया और मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 32 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
अदालत ने किया बरी
सुनवाई पूरी होने के बाद दिल्ली कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। इससे पहले नाबालिग पहलवान से जुड़े पॉक्सो (POCSO) मामले में भी अदालत दिल्ली पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर चुकी थी।
फैसले के बाद क्या बोले बृजभूषण?
अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा, “मैंने पहले दिन ही कहा था कि अगर आरोप सही साबित हुए तो मैं खुद को फांसी पर लटका दूंगा। आज अदालत ने मुझे बरी कर दिया है। यह मेरे और मेरे समर्थकों के लिए अच्छी खबर है।”
देशभर में चर्चा में रहा था मामला
यह मामला देशभर में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। जंतर-मंतर पर पहलवानों के आंदोलन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिला था। अब अदालत के फैसले के साथ छह वयस्क महिला पहलवानों से जुड़े इस मामले की आपराधिक कार्यवाही फिलहाल समाप्त हो गई है।

