कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोनम वांगचुक के साथ मतभेद की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों आज भी एक ही सोच के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि वांगचुक के योगदान और बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
‘आंदोलन छात्रों का बन गया था’
इंडिया टुडे से बातचीत में दिपके ने बताया कि आंदोलन खत्म होने के बाद उन्होंने सोनम वांगचुक से फोन पर बात की थी। उन्होंने कहा कि आंदोलन के समापन पर उन्होंने छात्रों का धन्यवाद इसलिए किया क्योंकि 20 जुलाई के बाद यह आंदोलन पूरे देश के छात्रों और युवाओं का बन गया था।
दिपके ने कहा, “इस आंदोलन में युवाओं ने लाठीचार्ज झेला और सबसे बड़ी जिम्मेदारी निभाई। इसलिए मैंने उनका धन्यवाद किया।”
‘वांगचुक के बलिदान ने देश को जगाया’
दिपके ने कहा कि सोनम वांगचुक की 26 दिन की भूख हड़ताल ने पूरे देश को इस मुद्दे पर एकजुट किया। उन्होंने कहा, “उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर देश को जगाया। अगर उनकी भूख हड़ताल नहीं होती, तो शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी संभव नहीं होता।”
‘मैंने खुद उनसे अनशन खत्म करने की अपील की’
अभिजीत दिपके ने बताया कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सोनम वांगचुक से अनशन समाप्त करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, “मैं बार-बार उनसे कह रहा था कि आप अपना अनशन खत्म कर दीजिए। आंदोलन हम आगे जारी रखेंगे। जिस दिन उन्होंने अनशन समाप्त किया, मुझे बहुत राहत मिली।”
दिपके के इस बयान के बाद CJP और सोनम वांगचुक के बीच मतभेद की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है।


