सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे वीडियो और दावे देखने को मिलते हैं, जिनमें कहा जाता है कि दुनिया में कुछ जगहों पर आसमान से पत्थरों की बारिश होती है. पहली नजर में यह बात चौंकाने वाली लगती है, लेकिन क्या वाकई ऐसा संभव है? आइए जानते हैं कि विज्ञान इस बारे में क्या कहता है.
क्या सच में होती है पत्थरों की बारिश?
अब तक किसी भी वैज्ञानिक संस्था ने ऐसी जगह की पुष्टि नहीं की है, जहां नियमित रूप से पत्थरों की बारिश होती हो. वैज्ञानिकों के अनुसार बारिश, बर्फ, ओले और धूल भरी आंधियां सामान्य प्राकृतिक घटनाएं हैं, लेकिन पत्थरों की बारिश को वैज्ञानिक रूप से मान्यता नहीं मिली है.
फिर ऐसे दावे क्यों सामने आते हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक कई बार तेज हवाएं जमीन से छोटे कंकड़-पत्थर उठाकर कुछ दूरी पर गिरा देती हैं. ऐसे में लोगों को लगता है कि पत्थर आसमान से बरस रहे हैं, जबकि वे जमीन से ही उठे होते हैं.
इसके अलावा पहाड़ी इलाकों में चट्टानों का टूटना या ऊपर से पत्थरों का गिरना भी कई बार ऐसी घटनाओं की वजह बनता है.
उल्कापिंड भी बनते हैं गलतफहमी की वजह
NASA के अनुसार हर दिन लाखों छोटे उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं. इनमें से अधिकांश हवा में ही जलकर नष्ट हो जाते हैं, लेकिन कुछ बड़े टुकड़े जमीन तक पहुंच जाते हैं, जिन्हें मेटियोराइट (Meteorite) कहा जाता है.
अगर किसी इलाके में एक साथ कई उल्कापिंड गिर जाएं, तो लोग इसे पत्थरों की बारिश समझ लेते हैं. हालांकि वैज्ञानिक इसे मेटियोराइट फॉल कहते हैं, न कि स्टोन रेन.
क्या किसी वैज्ञानिक संस्था ने इसकी पुष्टि की है?
नहीं. NASA, USGS, Smithsonian Institution और World Meteorological Organization (WMO) जैसी संस्थाओं के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है, जो यह साबित करे कि दुनिया में कहीं पत्थरों की बारिश होती है.
अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि धरती पर किसी जगह पत्थरों की बारिश होती है. ऐसे अधिकांश दावों के पीछे तेज हवाएं, पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टानों का टूटना या उल्कापिंडों का गिरना जैसी प्राकृतिक वजहें होती हैं. इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे दावों पर भरोसा करने से पहले वैज्ञानिक तथ्यों को जरूर जांच लेना चाहिए.


