जम्मू-कश्मीर और लद्दाख इस वर्ष एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन के गवाह बनने जा रहे हैं, जहां झेलम और सिंधु नदियों के किनारे भव्य कुंभ मेले का आयोजन किया जाएगा. उत्तर कश्मीर के बांदीपोरा जिले के शादिपोरा में 15 जुलाई से 26 जुलाई तक नौ दिनों का कुंभ मेला आयोजित किया जाएगा. इस आयोजन की घोषणा हाल ही में श्रीनगर में स्वामी कालिकानंद सरस्वती ने की.
स्वामी कालिकानंद सरस्वती ने बताया कि इस आयोजन के लिए सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में रहा जा रहा है और विस्तृत बैठकों का दौर जारी है. उन्होंने कहा कि अगर लोगों का सहयोग मिलेगा तो सुरक्षा कोई समस्या नहीं होगी. साथ ही, उन्होंने बताया कि भाजपा नेता अशोक कौल भी इस आयोजन के लिए सेना और जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ समन्वय बना रहे हैं.
क्या है इतिहास
स्वामी सरस्वती के अनुसार, कश्मीर में 1941 तक कुंभ मेले का आयोजन होता था, और अब इसे दोबारा शुरू करने का उद्देश्य यह संदेश देना है कि भगवान एक हैं, चाहे हम उन्हें किसी भी नाम से पुकारें. उन्होंने कहा कि इस आयोजन में जाति, धर्म या लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा. यह कुंभ मेला सनातन मूल्यों के साथ-साथ शांति और सौहार्द का संदेश भी देगा, जैसा कि पैगंबर मोहम्मद ने भी सिखाया है.
आयोजकों के अनुसार, कुंभ मेला एक प्रमुख धार्मिक तीर्थ है, जो आमतौर पर हर 6 या 12 साल में आयोजित किया जाता है. इस दौरान श्रद्धालु त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान भी करेंगे. स्वामी सरस्वती ने स्थानीय लोगों से इस आयोजन में सहयोग और भागीदारी की अपील की है.
क्या दिया जाएगा संदेश
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में शिया समुदाय द्वारा ईरान के समर्थन में किए गए प्रयासों की सराहना की गई है और उम्मीद जताई कि कश्मीरी पंडितों के लिए भी इसी तरह का समर्थन देखने को मिलेगा, जिन्होंने अतीत में कठिनाइयों का सामना किया है. इस कुंभ के माध्यम से यह संदेश भी दिया जाएगा कि भारत सभी का है और कश्मीर भारत माता का अभिन्न हिस्सा है.
इस आयोजन में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी धर्मों के लोगों—मुस्लिम, ईसाई और सिख—को आमंत्रित किया गया है, ताकि आपसी भाईचारे को मजबूत किया जा सके.
लद्दाख में सिंधु महाकुंभ का आयोजन
वहीं, लद्दाख में पहली बार सिंधु नदी के तट पर ‘सिंधु महाकुंभ’ का आयोजन किया जाएगा. लेह में स्थित सिंधु घाट को इस आयोजन के लिए तैयार किया जा रहा है. लद्दाख के उपराज्यपाल ने हाल ही में सिंधु घाट का दौरा कर वहां सौंदर्यीकरण और सुविधाओं के विस्तार के निर्देश दिए. उन्होंने घाट तक जाने वाले मार्गों पर सजावटी गमले लगाने, स्वच्छता बनाए रखने और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया.
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा देगा.


