लखनऊ में बढ़ती ई-रिक्शों की संख्या और प्रमुख मार्गों पर उनके संचालन को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने नौ सदस्यीय समिति गठित की है. हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में राजधानी की यातायात व्यवस्था, सड़क पर अतिक्रमण, जल निकासी और पार्किंग की समस्याओं को लेकर चल रही जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार ने यह जानकारी दी.
सरकार के मुताबिक, समिति का गठन 1 अक्टूबर को किया गया है. इसमें राजस्व, एलडीए, ट्रैफिक, पुलिस और परिवहन समेत अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है. समिति को 10 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.
हाईकोर्ट ने मांगी अब तक की कार्रवाई की जानकारी
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है. मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी.
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने सूरज सिंह विसेन की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया.
ट्रैफिक व्यवस्था के लिए कंसल्टेंट नियुक्त
अदालत को बताया गया कि एलडीए ने यातायात प्रबंधन के विशेषज्ञ स्टूडियो अर्बनलिंक एलएलपी को कंसल्टेंट नियुक्त किया है. कंसल्टेंट शहर की अलग-अलग सड़कों पर यातायात के घनत्व और आवागमन का अध्ययन कर चुका है. अब शहर में यातायात की मौजूदा स्थिति का भी अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.
पॉलिटेक्निक-कमता मार्ग पर फिर हुआ अतिक्रमण
पॉलिटेक्निक चौराहे से कमता चौराहे के बीच सड़क पर दोबारा हुए अतिक्रमण को लेकर भी कोर्ट को जानकारी दी गई. बताया गया कि जिन जगहों से पहले अतिक्रमण हटाया गया था, वहां करीब 50 लोगों ने फिर कब्जा कर लिया.
इन लोगों के खिलाफ चालान की कार्रवाई की गई है. अधिकारियों ने कोर्ट को बताया कि सार्वजनिक सड़कों पर दोबारा अतिक्रमण रोकने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा.
शहीद पथ से कमता तक अंडरपास का होगा अध्ययन
कोर्ट के पहले के निर्देश पर शहीद पथ से कमता चौराहे या पॉलिटेक्निक की ओर अंडरपास बनाने के विकल्प का अध्ययन किया जा रहा है. इस संबंध में और अध्ययन की जरूरत बताते हुए अधिकारियों ने अतिरिक्त समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया.
इसके साथ ही क्लोवरलीफ इंटरचेंज बनाने की संभावना का भी अध्ययन किया जाएगा.
जल निकासी के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट
लखनऊ में जल निकासी की समस्या को लेकर नगर निगम ने बताया कि शहर के ड्रेनेज प्लान के लिए पांच करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है. इस काम के लिए जल निगम की सहायक संस्था सीएनडीएस को सब-कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है.
ड्रेनेज प्लान तैयार होने के बाद नगर निगम उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा. योजना के तहत शहर के प्रमुख नालों को आपस में जोड़कर व्यापक जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की संभावना है. इससे बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी की निकासी बेहतर तरीके से हो सकेगी और जल निकासी व्यवस्था को सीवेज सिस्टम से अलग किया जा सकेगा.
पार्किंग के लिए 25 भवनों को नोटिस
शहर में पार्किंग की समस्या को लेकर 25 भवनों को नोटिस जारी किए गए हैं. इन भवनों के नक्शे में बेसमेंट पार्किंग की मंजूरी दी गई थी.
अधिकारियों की कोशिश है कि जिन भवनों में बेसमेंट पार्किंग स्वीकृत है, उनका इस्तेमाल वास्तव में वाहनों की पार्किंग के लिए ही हो. साथ ही मुख्य सड़कों पर कार और दोपहिया वाहनों की पार्किंग रोकने की भी कोशिश की जा रही है, ताकि यातायात व्यवस्था बाधित न हो.


