रक्षाबंधन के पर्व के साथ पौड़ी के ग्रामीण इलाकों में हस्तनिर्मित राखियों की मांग बढ़ रही है। खास बात यह है कि इन राखियों को स्थानीय ग्रामीण महिलाएं पीरूल, धागों और पहाड़ी सामग्री से अपने घरों पर तैयार कर रही हैं। इससे महिलाओं को घर बैठे आमदनी का जरिया मिल रहा है और स्थानीय संसाधनों से बने उत्पादों को भी बाजार में पहचान मिल रही है।
पीरूल से तैयार हो रहीं आकर्षक राखियां | Handmade Rakhi from Pine Needles
विकासखंड पौड़ी के भिताईं मल्ली गांव की विजया देवी लंबे समय से घर पर हाथ से राखियां तैयार कर रही हैं। वह पीरूल के धागों और स्थानीय पहाड़ी सामग्री का इस्तेमाल कर पारंपरिक और आकर्षक डिजाइन की राखियां बनाती हैं। उनके अनुसार इन राखियों को बाजार में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है और स्थानीय व्यापारी भी लगातार उनसे राखियों की मांग कर रहे हैं।
गांव की रीना देवी भी बनीं आत्मनिर्भर
पौड़ी के निसणी गांव की रीना देवी भी राखी निर्माण के साथ अन्य पहाड़ी उत्पाद तैयार कर स्वरोजगार से जुड़ी हैं। इस रक्षाबंधन पर उनकी बनाई राखियों की मांग बढ़ी है। वह अलग-अलग अवसरों के लिए जैविक रंग, टोकरियां और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद भी तैयार करती हैं। रीना के मुताबिक ब्लॉक स्तर से उन्हें काम के लिए जरूरी सहयोग और प्रोत्साहन मिल रहा है।
स्थानीय सामग्री बनी रोजगार का आधार
महिलाओं को स्थानीय संसाधनों से जुड़े स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हिमोत्थान के सहयोग से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं पीरूल समेत अन्य पारंपरिक सामग्री से उपयोगी और आकर्षक उत्पाद तैयार कर रही हैं। तैयार उत्पादों को स्थानीय बाजार तक पहुंचाने में स्वयं सहायता समूह भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
घर बैठे बढ़ रही आमदनी
हस्तनिर्मित राखियों ने ग्रामीण महिलाओं के लिए घर से काम करने का अवसर तैयार किया है। महिलाएं अपनी घरेलू जिम्मेदारियों के साथ राखी और दूसरे स्थानीय उत्पाद तैयार कर आय अर्जित कर रही हैं। इससे उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ अपने पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने का भी मौका मिल रहा है।
प्रशिक्षण से बाजार तक पहुंचाने की कोशिश
मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी के अनुसार स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को स्थानीय संसाधनों पर आधारित उत्पाद तैयार करने के लिए प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है। रक्षाबंधन के अवसर पर महिलाओं द्वारा तैयार पारंपरिक और हस्तनिर्मित राखियों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
स्थानीय उत्पादों को मिल रही नई पहचान
ऐसे प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं को घर के नजदीक रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। साथ ही पीरूल और अन्य पहाड़ी सामग्री से तैयार उत्पादों को बाजार में नई पहचान मिल रही है। प्रशिक्षण, उत्पादन और बाजार को एक-दूसरे से जोड़कर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।


