उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सल्ट क्षेत्र में पिछले कई दिनों से दहशत का कारण बना हिंसक बाघ आखिरकार वन विभाग के कब्जे में आ गया। कार्बेट और कालागढ़ टाइगर रिजर्व से लगे तड़म गांव में एक ग्रामीण की जान लेने वाले इस बाघ को विशेषज्ञ टीम ने ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित पकड़ लिया। बाघ के पकड़े जाने के बाद पूरे इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है।
वन विभाग के अनुसार यह वही वयस्क नर बाघ है, जिसने पिछले एक महीने में दो अलग-अलग घटनाओं में इंसानों पर हमला किया था। बाघ को देर रात बेहोश करने के बाद रामनगर स्थित कार्बेट टाइगर रिजर्व के रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया।
महिपाल सिंह पर किया था जानलेवा हमला
तल्ला सल्ट के तड़म गांव में तीन मई की शाम 55 वर्षीय महिपाल सिंह मेहरा अपनी पत्नी के साथ घास लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान घर के पास खेत में घात लगाए बैठे बाघ ने पीछे से उन पर हमला कर दिया। हमले में उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया था।
ग्रामीण लगातार दावा कर रहे थे कि हमला बाघ ने किया है, जबकि वन विभाग यह पुष्टि करने में जुटा था कि हमलावर बाघ था या गुलदार। इसके लिए ड्रोन कैमरे और ट्रैप कैमरों की मदद से लगातार निगरानी की जा रही थी।
चार दिन तक चला सर्च ऑपरेशन
वन क्षेत्राधिकारी गंगाशरण के नेतृत्व में करीब 30 वन कर्मियों की तीन टीमों को इलाके में तैनात किया गया था। टीमों ने दिन-रात जंगल और आबादी वाले इलाकों में गश्त की। साथ ही कार्बेट टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञों और शूटर दल की भी मदद ली गई।
लगातार चार दिन तक वन्यजीव की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद यह साफ हुआ कि मोहान सफारी जोन के ऊपरी हिस्से और तड़म गांव के आसपास एक बाघ सक्रिय है। विशेषज्ञ शूटर दल ने देर रात आबादी की ओर बढ़ रहे बाघ को ट्रैंकुलाइज कर काबू में कर लिया।
पांच दिन बाद खुलेंगे स्कूल
बाघ के आतंक के चलते क्षेत्र के तीन सरकारी विद्यालय पिछले पांच दिनों से बंद थे। अब वन विभाग ने स्कूल दोबारा खोलने का फैसला लिया है। हालांकि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए वन कर्मियों की गश्त जारी रहेगी।
वन क्षेत्राधिकारी गंगाशरण ने बताया कि बच्चों को स्कूल पहुंचाने और वापस घर भेजने के दौरान वन विभाग की टीम निगरानी करेगी, ताकि किसी भी खतरे से बचाव किया जा सके।
ग्रामीणों को मिली राहत
बाघ के पकड़े जाने के बाद तड़म और आसपास के गांवों के लोगों ने राहत महसूस की है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से लोग शाम होते ही घरों में कैद हो जाते थे और बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे थे।
वन विभाग ने फिलहाल इलाके में निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।


