उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. एक तरफ समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बीजेपी समेत बड़े दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ कई नए राजनीतिक मोर्चे भी आकार लेते दिखाई दे रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने वाली दिव्या मित्तल अपनी राजनीतिक पार्टी बनाकर चुनावी मैदान में उतर सकती हैं. वहीं, नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर आरोप लगाकर सुर्खियों में आईं रोहिणी घावरी भी यूपी की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा सकती हैं.
दिव्या मित्तल बनाएंगी अपनी पार्टी?
दिव्या मित्तल ने राजनीतिक पारी शुरू करने का ऐलान पहले ही कर दिया था. हालांकि, उस समय उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया था कि वह किसी मौजूदा राजनीतिक दल का हिस्सा बनेंगी या अपनी पार्टी बनाएंगी. अब सूत्रों के मुताबिक, दिव्या मित्तल किसी स्थापित पार्टी में शामिल होने के बजाय खुद की पार्टी बनाने पर गंभीरता से विचार कर रही हैं.
सूत्रों की मानें तो वह 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपने लिए राजनीतिक रूप से मुफीद सीट की तलाश भी कर रही हैं. मिर्जापुर और बलिया की कुछ विधानसभा सीटों को लेकर चर्चा चल रही है. हालांकि, उनकी पार्टी और चुनाव लड़ने को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.
रोहिणी घावरी भी यूपी में होंगी सक्रिय
दूसरी ओर, रोहिणी घावरी भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होती दिखाई दे सकती हैं. पिछले महीने स्विट्जरलैंड से लौटने के बाद उन्होंने लखनऊ समेत यूपी के कई इलाकों का दौरा किया था. माना जा रहा है कि वह पासी समाज से जुड़े मुद्दों और अधिकारों को लेकर अपनी आवाज और मुखर कर सकती हैं.
फिलहाल रोहिणी घावरी ने किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है. हालांकि, सूत्रों का दावा है कि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो वह 2027 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर भी मैदान में उतर सकती हैं.
एआईएमआईएम और चंद्रशेखर के बीच बन सकता है मोर्चा
यूपी की सियासत में एक और मोर्चे की संभावना भी जताई जा रही है. एआईएमआईएम, चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी और कुछ अन्य छोटे दल साथ आकर नया राजनीतिक गठजोड़ बना सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो चुनावी मुकाबला कई सीटों पर और दिलचस्प हो सकता है.
छोटे दल बढ़ाएंगे बड़े दलों की मुश्किल?
2027 के चुनाव में अगर कई छोटे दल और नए राजनीतिक चेहरे अलग-अलग मोर्चों के साथ मैदान में उतरते हैं तो इसका असर स्थापित राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों पर पड़ सकता है. खासतौर पर उन सीटों पर जहां मुकाबला पहले से ही करीबी माना जा रहा है, वहां वोटों का बंटवारा चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है.
यही वजह है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाओं के बीच छोटे दलों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर भी काम कर रही है. स्वामी प्रसाद मौर्य की अपना समाज पार्टी और पल्लवी पटेल की अपना दल (कमेरावादी) जैसे दलों को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. कांग्रेस की ओर से लगातार नेताओं और विभिन्न राजनीतिक समूहों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश भी की जा रही है.
यूपी में 2027 में होंगे विधानसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं और यहां अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना है. हालांकि, चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान अभी नहीं हुआ है. माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव फरवरी या मार्च 2027 के आसपास हो सकते हैं. चुनाव कार्यक्रम की घोषणा भारत निर्वाचन आयोग की ओर से की जानी बाकी है.


