उत्तराखंड में हरेला पर्व के अवसर पर जहां प्रदेशभर में पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण के कार्यक्रम आयोजित किए गए, वहीं ऋषिकेश में हजारों पेड़ों की प्रस्तावित कटाई के विरोध में पर्यावरण प्रेमियों का आंदोलन लगातार जारी है। देहरादून-ऋषिकेश हाईवे के सात मोड़ क्षेत्र में प्रदर्शनकारी पिछले नौ दिनों से धरने पर बैठे हैं और पेड़ों से चिपककर उन्हें कटने से बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
4,369 पेड़ों की कटाई का विरोध
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन परियोजना के लिए कुल 4,369 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर दशकों पुराने साल के जंगलों को खत्म किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण और जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ेगा।
आंदोलन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पर्यावरण कार्यकर्ता और महिलाएं शामिल हैं। एक महिला अपनी दो साल की बच्ची के साथ भी धरने में शामिल होकर विरोध जता रही हैं। प्रदर्शनकारी हाथों में “पेड़ बचाओ, भविष्य बचाओ” और “जंगल नहीं बचेंगे तो जीवन नहीं बचेगा” जैसे संदेश लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं।
350 से अधिक पेड़ कटने का दावा
आंदोलनकारियों का दावा है कि परियोजना की शुरुआत में करीब 173 पेड़ काटे गए थे। विरोध और बारिश के कारण कटाई की रफ्तार कुछ समय धीमी हुई, लेकिन अब तक 350 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। हालांकि, इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एनएचएआई ने परियोजना का किया बचाव
पेड़ों की कटाई को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने परियोजना का बचाव किया है। एनएचएआई के देहरादून परियोजना निदेशक सौरभ सिंह ने कहा कि सड़क का डिजाइन तैयार करते समय पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। उनके अनुसार परियोजना में सभी आवश्यक पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है।
पर्यावरण बनाम विकास की बहस तेज
पेड़ों की कटाई को लेकर विशेषज्ञ भी चिंता जता रहे हैं। उनका मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों के हटने से क्षेत्र के पर्यावरण, जलवायु और वन्यजीवों पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि परियोजना की दोबारा समीक्षा कर पेड़ों की कटाई का वैकल्पिक समाधान निकाला जाए।


