हिंदी सिनेमा के मशहूर गीतकार, लेखक, कवि और फिल्मकार गुलजार आज अपना 92वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपने खास अंदाज की शायरी, भावुक गीतों और संवेदनशील लेखन के लिए पहचाने जाने वाले गुलजार ने दशकों से भारतीय सिनेमा और साहित्य को अपनी रचनात्मकता से समृद्ध किया है।
18 अगस्त 1934 को झेलम जिले के दीना में जन्मे गुलजार का असली नाम संपूरण सिंह कालरा है। विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया और आगे चलकर उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई।
गुलजार ने बतौर गीतकार कई यादगार फिल्मों के लिए गीत लिखे। उनके लिखे गीतों में प्रेम, रिश्तों, जिंदगी और जुदाई की भावनाओं को बेहद खूबसूरत अंदाज में शब्द मिले। ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी’, ‘तेरे बिना जिंदगी से’, ‘मेरा कुछ सामान’ और ‘दिल से रे’ जैसे गीत आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।
फिल्म निर्देशन में भी बनाई पहचान
गुलजार ने सिर्फ गीत और कविताएं ही नहीं लिखीं, बल्कि बतौर निर्देशक भी अपनी अलग पहचान बनाई। ‘मेरे अपने’, ‘अचानक’, ‘अंगूर’, ‘मौसम’, ‘इजाजत’ और ‘लेकिन’ जैसी फिल्मों ने उनकी कहानी कहने की खास शैली को दर्शाया।
फिल्म ‘इजाजत’ के गीत ‘मेरा कुछ सामान’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। इसके अलावा गुलजार को साहित्य और सिनेमा में उनके योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं।
ऑस्कर और ग्रैमी तक पहुंचा नाम
गुलजार ने साल 2008 में फिल्म ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ के गीत ‘जय हो’ के लिए ऑस्कर जीता। इसी गीत के लिए उन्हें ग्रैमी अवॉर्ड भी मिला।
भारत सरकार ने उन्हें 2004 में पद्म भूषण से सम्मानित किया। साल 2013 में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से भी नवाजा गया।
92 साल की उम्र में भी गुलजार की रचनाएं नई पीढ़ी के बीच उतनी ही लोकप्रिय हैं। उनकी कविताएं और गीत आज भी लोगों को रिश्तों, यादों और जिंदगी की छोटी-बड़ी भावनाओं से जोड़ते हैं।


