सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की भर्ती को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ कर दिया है. हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली धीरज चंदानी समेत 19 अभ्यर्थियों की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी.
हाईकोर्ट के फैसले में दखल से इनकार
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एस. चंद्रशेखर की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वह हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने के इच्छुक नहीं है. इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने अपील को खारिज कर दिया.
दरअसल, 25 मई को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अंतरिम आदेश देते हुए भर्ती प्रक्रिया पर यथास्थिति बनाए रखने को कहा था. साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPHESC) से जवाब मांगा गया था.
910 पदों पर शुरू हुई थी भर्ती
UPHESC ने साल 2022 में विज्ञापन संख्या-51 जारी कर सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर के 910 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी. इसके लिए करीब 82 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था.
बाद में नए आयोग यानी उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 16 और 17 अप्रैल 2025 को लिखित परीक्षा आयोजित की थी.
परीक्षा के बाद सामने आई थीं अनियमितताओं की शिकायतें
लिखित परीक्षा के बाद बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर एसटीएफ से गोपनीय जांच कराई गई.
जांच के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया था. इसके बाद भर्ती प्रक्रिया को दोबारा शुरू करते हुए 18 और 19 अप्रैल 2026 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई.
3155 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए सफल
दोबारा आयोजित लिखित परीक्षा का परिणाम 9 जून 2026 को जारी किया गया. लिखित परीक्षा में सफल हुए 3,155 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चयनित किया गया.
इन अभ्यर्थियों के साक्षात्कार का विस्तृत कार्यक्रम 21 जुलाई से जारी किया गया और इंटरव्यू प्रक्रिया शुरू हुई.
अब भर्ती प्रक्रिया पर आगे बढ़ सकेगा आयोग
सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार किए जाने के बाद सहायक प्रोफेसर के 910 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है. इससे लिखित परीक्षा में सफल 3,155 अभ्यर्थियों के इंटरव्यू और आगे की चयन प्रक्रिया पर बनी कानूनी अड़चन भी दूर हो गई है.


