पौड़ी गढ़वाल के बैंजवाड़ी गांव में दीपक नौटियाल की बागवानी की पहल ग्रामीण स्वरोजगार की मिसाल बन रही है. दिल्ली और यूरोप में नौकरी करने के बाद उन्होंने 2021 में कीवी सहित कई फलों का उत्पादन शुरू किया. आज उनके प्रयास से महिला स्वयं सहायता समूहों की करीब 120 महिलाएं रोजगार से जुड़ी हैं और पहाड़ के उत्पाद देश-विदेश तक पहुंच रहे हैं.
विदेश में नौकरी करने के बाद गांव लौटकर अपना काम शुरू करना आसान नहीं होता, लेकिन पौड़ी के क्यार्क गांव निवासी दीपक नौटियाल ने बागवानी के जरिए अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है. उन्होंने वर्ष 2021 में बैंजवाड़ी गांव में 30 नाली भूमि पर फल उत्पादन का फार्म शुरू किया. उनका यह प्रयास अब केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय महिलाओं को रोजगार देने और पहाड़ी उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने का माध्यम भी बन रहा है.
कीवी के 250 पौधे, सेब और माल्टा की भी खेती
दीपक ने शुरुआत में कीवी के 50 पौधे लगाए थे. वर्ष 2022 में उन्होंने इनकी संख्या बढ़ाई और अब उनके फार्म में कीवी के करीब 250 पौधे हैं. इसके अलावा सेब के 400 पौधे और नींबू-माल्टा के लगभग 150 पौधे लगाए गए हैं. फार्म में पुलम, एप्रिकॉट और अन्य फलों का उत्पादन भी किया जाता है.
दीपक के मुताबिक, उनके फार्म में एक सीजन में करीब 18 क्विंटल कीवी का उत्पादन होता है. कीवी की तुड़ाई अक्टूबर में की जाती है. बागवानी को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से 80 प्रतिशत सब्सिडी के तहत सहायता ली. सिंचाई के लिए विभाग की ओर से टैंक उपलब्ध कराया गया, जबकि कृषि विभाग ने फार्म में घेरबाड़ कराई.
120 महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल
दीपक नौटियाल ने स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों को भी अपने काम से जोड़ा है. फार्म से प्राप्त कीवी और दूसरे फलों की सफाई एवं प्रसंस्करण में महिलाएं योगदान देती हैं. करीब 10 से 12 महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लगभग 120 महिलाओं को रोजगार और आजीविका के अवसर मिल रहे हैं.
ये समूह बुरांश से जुड़े उत्पादों के साथ जैम, चटनी, अचार और बिस्किट जैसी चीजें भी तैयार करते हैं. इसके बाद उत्पादों की पैकेजिंग दिल्ली में की जाती है और उन्हें बाजार तक पहुंचाया जाता है. इस व्यवस्था के जरिए स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए ग्रामीण महिलाओं की आय के अवसर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु तक पहुंच रहे उत्पाद
अपने उत्पादों की बिक्री के लिए दीपक ने ‘रंगीलो छबीलो ग्रुप’ के माध्यम से ऑनलाइन मांग और मार्केटिंग की व्यवस्था बनाई है. दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित देश के कई शहरों से उत्पादों की मांग आती है. कुछ उत्पाद यूरोप तक भी पहुंचाए जाते हैं. मार्केटिंग के काम में करीब 22 लोगों की टीम जुड़ी हुई है.
दीपक बताते हैं कि सामान्य दिनों में फार्म में चार लोग काम करते हैं, जबकि सीजन के दौरान 10 से 15 लोगों को रोजगार मिलता है. वह खेती और बागवानी में बिना दवाइयों के उत्पादन पर भी जोर देते हैं. उनका मानना है कि स्थानीय उपज को प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बेहतर मार्केटिंग से जोड़कर पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं.


