नवरात्रि के बीच तेलंगाना में दांडिया आयोजकों पर मुस्लिम बाउंसर्स को काम पर नहीं रखने का आरोप लगा है. इस मामले ने राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है. हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कथित भेदभाव की निंदा करते हुए पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है. वहीं, बीजेपी से निलंबित विधायक टी. राजा सिंह ने हिंदू त्योहारों में केवल हिंदू बाउंसर्स को तैनात करने के कथित फैसले का समर्थन किया है.
‘धर्म नहीं, रोजगार के लिए लड़ रहे हैं’
इस विवाद के बीच हैदराबाद में बाउंसर एजेंसियों के प्रतिनिधियों और हिंदू-मुस्लिम सुरक्षा कर्मियों के एक समूह ने सभी को समान रोजगार के अवसर देने की मांग की है. इस महीने की शुरुआत में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रतिनिधियों ने कहा कि यह मामला धर्म से ज्यादा लोगों की आजीविका से जुड़ा है.
समूह की ओर से बात रखने वाले मोहम्मद फिरोज उर्फ फजल ने कहा कि मुस्लिम बाउंसर्स को कथित तौर पर काम नहीं दिए जाने से निजी सुरक्षा क्षेत्र में काम करने वाले सैकड़ों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है. त्योहारों के मौसम में मिलने वाला काम उनकी आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
उन्होंने कहा, “हम रोजगार के लिए लड़ रहे हैं, धर्म के लिए नहीं. मुस्लिम, हिंदू, ईसाई और सिख सभी को समान अवसर मिलने चाहिए. किसी को उसके नाम या धार्मिक पहचान के आधार पर काम से वंचित नहीं किया जाना चाहिए.”
फिरोज के मुताबिक, उन्होंने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाने के लिए असदुद्दीन ओवैसी से भी संपर्क किया था. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक नेता से व्यक्तिगत समर्थन हासिल करना नहीं, बल्कि रोजगार में कथित भेदभाव की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना था.
‘लव जिहाद’ के आरोपों पर भी दी सफाई
निजी सुरक्षा सेवाओं से जुड़े प्रतिनिधियों ने मुस्लिम बाउंसर्स को लेकर लगाए जा रहे ‘लव जिहाद’ के आरोपों को भी खारिज किया. उनका कहना है कि दांडिया कार्यक्रमों में बाउंसर्स की जिम्मेदारी सुरक्षा व्यवस्था संभालना, भीड़ को नियंत्रित करना और किसी भी तरह के विवाद को रोकना है.
फिरोज ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपराध करता है तो उसके खिलाफ सबूतों के आधार पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. किसी व्यक्ति के कथित अपराध के लिए पूरे समुदाय को रोजगार से वंचित करना उचित नहीं है.
उन्होंने बताया कि उनकी टीम में 10 गैर-मुस्लिम बाउंसर्स भी हैं, जो पिछले पांच वर्षों से उनके साथ काम कर रहे हैं. उनके मुताबिक, सभी सुरक्षा कर्मियों को उनके अनुभव, व्यवहार और पेशेवर योग्यता के आधार पर काम मिलना चाहिए, न कि उनके धर्म के आधार पर.
ओवैसी ने पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की
इस विवाद ने 6 अक्टूबर को राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब असदुद्दीन ओवैसी ने दांडिया आयोजकों द्वारा मुस्लिम बाउंसर्स को काम पर नहीं रखने की खबरों पर चिंता जताई. उन्होंने आरोप लगाया कि कथित चरमपंथी संगठनों के दबाव में ऐसा किया जा रहा है.
सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में ओवैसी ने तेलंगाना के लोगों से इस कथित भेदभाव के खिलाफ एकजुट रहने की अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि समाज में इस तरह के विभाजन से राज्य की प्रगति और विकास प्रभावित हो सकते हैं.
ओवैसी ने कहा कि पुलिस की सख्त कार्रवाई से इस तरह के कथित भेदभाव पर अंकुश लगाया जा सकता है.
राजा सिंह ने किया केवल हिंदू बाउंसर्स रखने के फैसले का समर्थन
ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए टी. राजा सिंह ने सवाल उठाया कि हिंदू त्योहारों में हिंदू या मुस्लिम बाउंसर्स की नियुक्ति को लेकर फैसला करने वाले ओवैसी कौन होते हैं.
एक वीडियो बयान में राजा सिंह ने दावा किया कि मुस्लिम त्योहारों के दौरान हिंदुओं को न तो प्रवेश दिया जाता है और न ही रोजगार के अवसर मिलते हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों से दांडिया कार्यक्रमों में मुस्लिम बाउंसर्स के समर्थन से हिंदू लड़कियों को निशाना बनाने वाले ‘लव जिहाद’ के मामले बढ़े हैं.
राजा सिंह ने दांडिया आयोजकों के कथित तौर पर केवल हिंदू बाउंसर्स को नियुक्त करने के फैसले की सराहना की. उन्होंने गैर-हिंदू सुरक्षा कर्मियों को रखने वाले कार्यक्रमों को रोकने की धमकी भी दी.
रोजगार में समान अवसर की मांग
इस पूरे विवाद के बीच निजी सुरक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने आयोजकों और प्रशासन से अपील की है कि सुरक्षा कर्मियों का चयन उनकी योग्यता, अनुभव और पेशेवर व्यवहार के आधार पर किया जाए.
समूह का कहना है कि त्योहारों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना उनका काम है और रोजगार को धार्मिक पहचान से जोड़ने के बजाय सभी को समान अवसर दिए जाने चाहिए. वहीं, इस मुद्दे पर ओवैसी और राजा सिंह के परस्पर विरोधी बयानों ने तेलंगाना में राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है.


