उत्तराखंड के बहुचर्चित UKSSSC भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्य आरोपी हाकम सिंह रावत के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत उसकी 63.30 लाख रुपये मूल्य की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनल अटैच) कर दिया है।
अवैध कमाई को वैध दिखाने का आरोप
ईडी की जांच के मुताबिक, हाकम सिंह ने भर्ती परीक्षा में पेपर लीक और अभ्यर्थियों से वसूली गई अवैध रकम को बैंक खातों, कृषि आय और संपत्ति खरीद के जरिए वैध दिखाने की कोशिश की। जांच में सामने आया कि उसने करीब 95 लाख रुपये अभ्यर्थियों से वसूले थे।
प्रिंटिंग एजेंसी और बिचौलियों के साथ चल रहा था नेटवर्क
जांच एजेंसी के अनुसार, हाकम सिंह प्रिंटिंग एजेंसी RMS Techno Solutions Pvt. Ltd. के कुछ कर्मचारियों, लोक सेवकों, बिचौलियों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर संगठित तरीके से पेपर लीक का नेटवर्क चला रहा था। आरोप है कि गोपनीय प्रश्नपत्र लीक कर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए जाते थे और बदले में मोटी रकम वसूली जाती थी।
कृषि आय का लिया सहारा
ईडी की वित्तीय जांच में पाया गया कि हाकम सिंह ने आयकर रिटर्न में कृषि आय दिखाई, जबकि वास्तविक कृषि गतिविधियां उस आय के अनुरूप नहीं थीं। एजेंसी का दावा है कि कृषि आय का इस्तेमाल अवैध नकदी को वैध दिखाने के लिए किया गया।
14 ठिकानों पर छापे, अहम सबूत मिले
ईडी ने बताया कि 14 स्थानों पर की गई तलाशी में दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद हुए। बैंक खातों के विश्लेषण, PMLA की धारा-50 के तहत दर्ज बयानों और SIT की चार्जशीट से भी हाकम सिंह और उसके सहयोगियों की भूमिका की पुष्टि हुई है।
जमानत के बाद फिर हुआ था गिरफ्तार
हाकम सिंह को जुलाई 2022 में UKSSSC पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद सितंबर 2025 में उसे फिर गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, वह अपने साथी के साथ अभ्यर्थियों से चयन कराने के नाम पर 12 से 15 लाख रुपये लेने की साजिश रच रहा था।
रसोइये से बना पेपर लीक नेटवर्क का सरगना
उत्तरकाशी के मोरी निवासी हाकम सिंह ने अपने करियर की शुरुआत एक प्रशासनिक अधिकारी के यहां रसोइये के रूप में की थी। बाद में वह नकल गिरोहों से जुड़ा और राजनीतिक व प्रशासनिक संपर्कों के दम पर भर्ती घोटालों का बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया। 2022 में पेपर लीक का खुलासा होने के बाद उसे भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। अब ईडी की कार्रवाई से भर्ती घोटाले के आर्थिक नेटवर्क पर भी जांच एजेंसियों का शिकंजा और कस गया है।

