सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram के एल्गोरिदम को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। भाजपा नेता अमित मालवीय ने आरोप लगाया है कि प्लेटफॉर्म कुछ तरह के कंटेंट को ज्यादा बढ़ावा देता है, जबकि दूसरे आंदोलनों से जुड़े कंटेंट की पहुंच सीमित रहती है।
दिल्ली और रांची के प्रदर्शन में बड़ा अंतर
डेटाबीइंग्स के आंकड़ों का हवाला देते हुए मालवीय ने दिल्ली के जंतर-मंतर और झारखंड के रांची में हुए छात्र प्रदर्शनों की तुलना की। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली प्रदर्शन से जुड़े 5,239 पोस्ट करीब 1.8 करोड़ लोगों तक पहुंचे। ये पोस्ट लगभग 3,100 यूनिक अकाउंट्स से किए गए थे।
वहीं रांची के प्रदर्शन से जुड़े 1,062 पोस्ट करीब 6 लाख लोगों तक ही पहुंचे। ये पोस्ट सिर्फ 290 यूनिक अकाउंट्स से किए गए थे।
रील्स के व्यूज में भी बड़ा अंतर
आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के प्रदर्शन से जुड़ी रील्स के व्यूज 20 जुलाई की झड़पों के बाद बढ़े और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के दिन औसतन करीब 3 लाख व्यूज प्रति रील तक पहुंच गए।
रांची में प्रदर्शन की शुरुआत में रील्स को करीब 2.8 लाख तक व्यूज मिले, लेकिन इसके बाद इनमें लगातार गिरावट दर्ज की गई। 10 अगस्त को पुलिस और छात्रों के बीच झड़प के समय तक इन कंटेंट की पहुंच काफी कम हो चुकी थी।
कैसे काम करता है Instagram का एल्गोरिदम?
Instagram का एल्गोरिदम यूजर की रुचि और उसके व्यवहार के आधार पर कंटेंट दिखाता है। यूजर किसी रील को कितनी देर देखता है, लाइक, शेयर या कमेंट करता है और किन पोस्ट पर रुकता है—इन संकेतों के आधार पर प्लेटफॉर्म उससे मिलता-जुलता कंटेंट आगे दिखाता है।
हालांकि, इन आंकड़ों से अपने आप यह साबित नहीं होता कि Instagram ने जानबूझकर किसी एक प्रदर्शन को बढ़ावा दिया और दूसरे को दबाया। अमित मालवीय ने इसी अंतर के आधार पर Meta के एल्गोरिदम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।


