NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या के मामलों में मुआवजे को लेकर केंद्र सरकार के आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। CJP के सह-संयोजक दास ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सरकार के सकारात्मक आश्वासन और उन्हें मिली न्यायिक मान्यता को देखते हुए संगठन ने मार्च वापस लेने का फैसला किया है।
दरअसल, CJP ने 24 अगस्त को 5 सितंबर को दिल्ली में इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया था। संगठन का आरोप था कि सरकार ने 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया है।
तीन महीने में मिलेगा मुआवजा
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को तीन महीने के भीतर मुआवजा दिया जाएगा।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया कि 20 से 25 जुलाई के बीच NEET प्रदर्शनकारियों के खिलाफ देशभर में दर्ज सभी FIR को अनुच्छेद 142 के तहत बंद करने पर विचार किया जाए।
वहीं, दिल्ली पुलिस ने सोमवार शाम सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वह जुलाई में CJP के नेतृत्व में हुए NEET प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR को अब आगे नहीं बढ़ाना चाहती।
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च पर दखल देने से किया था इनकार
CJP का मार्च वापस लेने का फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस रुख के एक दिन बाद आया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने या उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा था कि फिलहाल ऐसी कोई ठोस परिस्थिति सामने नहीं है, जिससे यह माना जाए कि प्रस्तावित प्रदर्शन हिंसक हो सकता है। कोर्ट ने कानून-व्यवस्था से जुड़ी व्यवस्था का फैसला केंद्र और दिल्ली सरकार पर छोड़ते हुए सभी पक्षों से शांतिपूर्ण और कानूनी दायरे में रहने की उम्मीद जताई थी।


