काठमांडू: नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। चीन सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ और चट्टानों के मलबे ने रसुवा समेत मध्य नेपाल के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। बाढ़ के तेज बहाव में सड़कें, पुल, बस्तियां और हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर बह गए। नेपाल पुलिस के मुताबिक, देश में अब तक 626 लोगों की मौत हो चुकी है।
नेपाल और तिब्बत में 2,478 लोग लापता
बाढ़ और भूस्खलन के बाद नेपाल और तिब्बत में कुल 2,478 लोग लापता बताए जा रहे हैं। इनमें नेपाल में 1,924 और तिब्बत में 554 लोग शामिल हैं। नेपाल की आपदा एजेंसी के मुताबिक, लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक, जिनमें पर्यटक और विदेशी कर्मचारी भी शामिल हैं, शामिल हैं। चीन की ओर भी 260 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, बाढ़ और भूस्खलन के बाद 121 पर्यटकों को सुरक्षित बचाया गया है। हालांकि, स्थानीय लोगों, विदेशी कामगारों और अन्य लोगों को मिलाकर कुल कितने लोगों को रेस्क्यू किया गया है, इसका आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।
बाढ़ से बना जलाशय बढ़ा रहा चिंता
आपदा के बाद चीन सीमा के पास बाढ़ से एक बड़ी झील बन गई है। शुक्रवार को इसका पानी बढ़कर ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदी की ओर बहने लगा, जिसके बाद नेपाल में दहशत फैल गई। कुछ समय के लिए बचाव अभियान भी रोकना पड़ा और चीनी बचाव दलों तथा वाहनों को एहतियातन पीछे हटना पड़ा।
हालात सामान्य होने के बाद बचाव अभियान दोबारा शुरू किया गया। नेपाल में अधिकारियों ने नदी के ऊपरी हिस्से में बने दो बैरियर लेक पर नजर रखी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक इन झीलों का पानी पूरी तरह नहीं निकलता, तब तक बाढ़ का खतरा बना रहेगा।
झील टूटने पर आ सकता है तेज पानी का बहाव
चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ के बाद बनी झील में शुक्रवार तक करीब 25 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। चीन ने पहले आशंका जताई थी कि अगले तीन दिनों में इसमें करीब 30 लाख घन मीटर और पानी जमा हो सकता है।
चीनी बाढ़ मॉडलिंग के अनुसार, अगर झील का प्राकृतिक बांध आंशिक रूप से टूटता है तो अधिकतम 500 घन मीटर प्रति सेकंड तक पानी का बहाव पैदा हो सकता है। हालांकि, चीन का अनुमान है कि पानी नदी के किनारों के भीतर ही रह सकता है और इसका डाउनस्ट्रीम प्रभाव सीमित हो सकता है।
रेस्क्यू टीमों को पहाड़ों के बीच करनी पड़ी मशक्कत
सबसे ज्यादा प्रभावित चीन-नेपाल सीमा के ग्यिरोंग बॉर्डर क्षेत्र में चीनी बचाव दल शुक्रवार को पहुंच सका। बाढ़ के कारण इलाके तक जाने वाली सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थीं। 21 सदस्यीय टीम के साथ एक खोजी कुत्ता भी अभियान में शामिल हुआ। टीम ने पहाड़ों, घाटियों, जंगलों और खड़ी चट्टानों के बीच रस्सियों की मदद से आगे बढ़कर तलाश शुरू की।
सीमा क्षेत्र से सामने आए निगरानी फुटेज में तेज पानी और मलबे को इमारतों को घेरते हुए देखा गया। कई लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।
भारत समेत चार देशों की टीमें मदद के लिए पहुंचीं
नेपाल ने शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय सर्च एंड रेस्क्यू सहायता लेने से इनकार किया था। उसका कहना था कि उसके अपने बचाव दल स्थिति संभालने में सक्षम हैं। हालांकि, बाद में नेपाल ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमों को मदद की अनुमति दी।
इन टीमों की मदद खास तौर पर सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने, डीएनए टेस्ट और फॉरेंसिक जांच जैसे कामों में ली जा रही है।
पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर की जरूरत
नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही के बाद बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की चुनौती सामने है। नेपाल के वित्त मंत्री के मुताबिक, देश को सड़कों, पुलों, बस्तियों और अन्य बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए करीब 4 से 5 अरब डॉलर की जरूरत पड़ सकती है।
लगातार लापता लोगों की तलाश जारी है, लेकिन खराब मौसम, तबाह सड़कों और भूस्खलन के कारण राहत एवं बचाव अभियान में लगातार मुश्किलें आ रही हैं। अधिकारियों ने लोगों से नदियों और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने और किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की है।


