शाहजहांपुर नगर निगम के कई पार्षदों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में कुछ पार्षद हाथ में पानी लेकर नगर निगम से होने वाली आमदनी को आपस में बराबर बांटने की शपथ लेते नजर आ रहे हैं। वीडियो में एक पार्षद शपथ दिलाता है और बाकी पार्षद उसके शब्दों को दोहराते दिखाई देते हैं।
वीडियो में कथित तौर पर गद्दारी करने वाले पार्षद को लेकर मां के नाम से आपत्तिजनक टिप्पणी भी की गई है। वीडियो में नजर आ रहे ज्यादातर पार्षदों के भाजपा से जुड़े होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो करीब 6 महीने पुराना बताया जा रहा है और मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे सामने आया। इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
शपथ में ‘बराबर कमाई बांटने’ की बात
वीडियो में पार्षदों को यह कहते सुना जा सकता है कि नगर निगम से होने वाली आमदनी सभी के बीच बराबर बांटी जाएगी। साथ ही किसी एक पार्षद पर कोई कार्रवाई या आंच आने की स्थिति में सभी उसके साथ खड़े रहेंगे।
शपथ के दौरान कुछ पार्षद हाथ में लिया पानी जमीन पर फेंकते हुए दिखाई देते हैं, जबकि कुछ उसे पीते नजर आते हैं। इसी दौरान गद्दारी करने वाले पार्षद के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया जाता है।
महापौर ने वीडियो की जानकारी से किया इनकार
वीडियो सामने आने के बाद महापौर अर्चना वर्मा ने मामले की जानकारी होने से इनकार किया है। नगर आयुक्त से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।
वीडियो में शपथ दिलाते नजर आ रहे पार्षद लालू पुजारी से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
कांग्रेस और सपा ने कार्रवाई की मांग की
वीडियो को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रजनीश गुप्ता उर्फ मुन्ना ने नगर निगम में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि पार्षद चुनाव जीतने के बाद एक शपथ लेते हैं, लेकिन अब दूसरी तरह की शपथ का वीडियो सामने आया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर असली शपथ कौन-सी है।
सपा जिलाध्यक्ष तनवीर खां ने भी वीडियो को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नगर निगम जनता से जुड़ी संस्था है और वीडियो में कही गई बातें जनता के बीच गलत संदेश देंगी।
2018 में नगर निगम बना था शाहजहांपुर
शाहजहांपुर नगर पालिका को 17 अप्रैल 2018 को नगर निगम घोषित किया गया था। 2023 में हुए नगर निगम चुनाव में भाजपा के 41 पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसके अलावा अन्य दलों के पार्षद भी चुनाव जीते थे, जबकि कुछ पार्षद शासन की ओर से नामित किए गए हैं।
पहले भी भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर चुका है निगम
शाहजहांपुर नगर निगम में इससे पहले भी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप सामने आ चुके हैं। हाल ही में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और टेंडर में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर भदौरिया कंस्ट्रक्शन कंपनी के संचालक सुनील कुमार सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। फर्म को ब्लैकलिस्ट भी किया गया था।
आउटसोर्सिंग भर्ती में भी उठे थे सवाल
नगर निगम में आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों की भर्ती को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। आरोप था कि कुछ कर्मचारियों ने अपने रिश्तेदारों और करीबियों को सफाई कर्मचारी के पद पर नियुक्त करा दिया।
जांच के दौरान 22 ऐसे कर्मचारियों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया, जिनकी तैनाती और उपस्थिति को लेकर सवाल थे। इसके बाद निगम ने इन कर्मचारियों का वेतन रोक दिया था। अब भर्ती प्रक्रिया और कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति की जांच की जा रही है।


