देहरादून के तपोवन स्थित विष्णुलोक में हुए तिहरे हत्याकांड की भयावहता पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई है। छह अक्तूबर को 80 वर्षीय रमेश कपूर, उनकी 75 वर्षीय पत्नी रजनी कपूर और उन्हें बचाने पहुंची घरेलू सहायिका तिलया देवी की हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी प्लंबर राजकुमार ने तीनों पर पेचकस से कुल 34 वार किए।
बुधवार को कोरोनेशन अस्पताल में दो डॉक्टरों के पैनल ने तीनों शवों का वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया। प्रत्येक शव के पोस्टमार्टम में करीब दो घंटे लगे और शाम छह बजे प्रक्रिया पूरी हुई। पोस्टमार्टम में सामने आया कि रमेश कपूर पर 12, रजनी कपूर पर आठ और तिलया देवी पर 14 बार पेचकस से हमला किया गया था।
रजनी का हार्ट हुआ पंक्चर, तिलया पर सबसे ज्यादा वार
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने सबसे पहले रमेश कपूर पर हमला किया। उनके पेट, छाती और चेहरे पर पेचकस से 12 वार किए गए। पति को बचाने पहुंचीं रजनी कपूर पर आरोपी ने पेट और छाती में आठ गहरे वार किए। हमले में उनका हार्ट पंक्चर हो गया।
इसी दौरान चीख-पुकार सुनकर पड़ोस में काम करने वाली तिलया देवी वहां पहुंचीं। उन्होंने आरोपी को रोकने की कोशिश की तो राजकुमार ने उन पर हमला कर दिया। तिलया के पेट और छाती पर पेचकस से 14 वार किए गए। वह गंभीर रूप से घायल हो गईं और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई।
पहले दो घंटे किया प्लंबिंग का काम
पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक राजकुमार वारदात वाले दिन सुबह कपूर परिवार के घर करीब दो घंटे तक प्लंबिंग का काम करता रहा। रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद के बाद वह वहां से चला गया। आरोप है कि कुछ देर बाद वह दोबारा घर लौटा और परिवार से फिर विवाद हुआ। इसके बाद उसने लूटपाट की कोशिश की और तीनों पर हमला कर दिया।
हालांकि, परिवार ने पुलिस की 300 रुपये की दिहाड़ी के विवाद वाली थ्योरी पर सवाल उठाए हैं। मुंबई से देहरादून पहुंचे रमेश कपूर के छोटे बेटे रजत ने दावा किया कि आरोपी पहले भी घर में काम कर चुका था और परिवार की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। परिजनों का आरोप है कि वह इस बात का इंतजार कर रहा था कि परिवार कब घर में अकेला मिले।
पाकिस्तान से भारत आया था परिवार
तिहरे हत्याकांड ने कपूर परिवार को भीतर तक झकझोर दिया है। परिजनों के मुताबिक परिवार कभी असुरक्षा के माहौल से बचने के लिए पाकिस्तान से भारत आया था। रमेश कपूर ने आयुध निर्माणी में नौकरी के दौरान वर्ष 2000 में विष्णुलोक में अपना घर बनाया था। करीब 26 वर्षों से यह मकान परिवार के लिए सुरक्षित जीवन की पहचान बना हुआ था, लेकिन इसी घर में दिनदहाड़े हुई वारदात ने पूरे परिवार और आसपास के लोगों को सदमे में डाल दिया है।
रमेश कपूर के बेटे रजत के मुताबिक आरोपी कुछ दिन पहले घर की छत पर डैमप्रूफिंग का काम करने आया था। बारिश में काम खराब होने के बाद उसे दोबारा ठीक किया जाना था।
52 साल साथ रहे रमेश-रजनी, अंतिम विदाई भी साथ
रमेश कपूर और रजनी कपूर ने करीब 52 साल साथ बिताए। दोनों की शादी वर्ष 1974 में परिवारों की सहमति से हुई थी। जिंदगी के सुख-दुख में साथ रहने वाला यह दंपति आखिरी वक्त में भी एक-दूसरे को बचाने की कोशिश करता रहा।
रमेश कपूर वर्ष 2004 में आयुध निर्माणी विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे। रजनी कपूर भी शिक्षिका के तौर पर अपनी सेवा पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुई थीं। अब दोनों की जिंदगी का अंत भी एक ही घर में एक साथ हुआ, जिसने परिवार के साथ उनके लंबे और सुरक्षित जीवन की यादें संजोए थीं।


