उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तैयारियों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक गलियारों में दोनों दलों के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग तय होने की चर्चा है. बताया जा रहा है कि दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के बीच शुरुआती दौर की बातचीत हो चुकी है और जल्द ही सीटों की संख्या को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है.
चर्चाओं के मुताबिक, इस गठबंधन में समाजवादी पार्टी बड़ी भूमिका में रह सकती है, जबकि कांग्रेस छोटे सहयोगी दल के रूप में चुनाव लड़ सकती है. सीटों का बंटवारा संबंधित क्षेत्रों में दोनों दलों की राजनीतिक स्थिति और दावेदारी को ध्यान में रखकर किए जाने की संभावना जताई जा रही है.
एक और चर्चा यह है कि कांग्रेस की कुछ परंपरागत सीटों पर उसके नेताओं को समाजवादी पार्टी के चुनाव चिह्न साइकिल से टिकट दिया जा सकता है. हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
अखिलेश यादव पुराने गठबंधन के संकेत दे चुके हैं
सपा प्रमुख अखिलेश यादव पहले ही उत्तर प्रदेश में पुराने गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं. प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं और ऐसे में दोनों दलों के सामने सीटों का संतुलन तय करना अहम होगा.
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने 2017 के विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन किया था. उस समय सपा ने 298 सीटों पर और कांग्रेस ने 105 सीटों पर चुनाव लड़ा था. हालांकि, भाजपा की बड़ी जीत के बीच दोनों दलों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा.
2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने कांग्रेस के बजाय कई छोटे दलों के साथ गठबंधन किया. इस बार सपा को 111 सीटों पर जीत मिली, जबकि अकेले चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस केवल दो सीटें जीत सकी.
इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने फिर साथ चुनाव लड़ा. दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश में कुल 43 सीटें जीतीं. इसी प्रदर्शन के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं.
परंपरागत सीटों पर सपा-कांग्रेस की नजर
सीट बंटवारे में दोनों दलों की परंपरागत सीटें अहम भूमिका निभा सकती हैं. चर्चा है कि समाजवादी पार्टी उन सीटों पर अपनी दावेदारी बनाए रखना चाहेगी, जहां उसका संगठन मजबूत रहा है और जहां उसे पिछले चुनावों में बेहतर परिणाम मिले थे.
इसी तरह कांग्रेस भी अपनी पुरानी और प्रभाव वाली सीटों पर दावा कर सकती है. जिन सीटों पर दोनों दलों के बीच सहमति बनाना मुश्किल होगा, वहां उम्मीदवार और स्थानीय राजनीतिक समीकरण अहम हो सकते हैं.
हालांकि, उम्मीदवारों को हरी झंडी दिए जाने या किसी सीट पर अंतिम फैसला होने की जानकारी की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है.
2017 में सपा-कांग्रेस गठबंधन का कैसा रहा था प्रदर्शन?
2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था. राहुल गांधी और अखिलेश यादव की संयुक्त प्रचार मुहिम को ‘दो लड़कों की जोड़ी’ कहा गया था. लेकिन चुनाव परिणाम दोनों दलों के लिए निराशाजनक रहे.
- समाजवादी पार्टी: 298 सीटों पर चुनाव लड़ी और 47 सीटें जीतीं.
- कांग्रेस: 105 सीटों पर चुनाव लड़ी और सात सीटों पर जीत हासिल की.
इस चुनाव में भाजपा ने भारी बहुमत हासिल किया था. सपा के कई उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे, लेकिन बड़ी संख्या में सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.
2022 में कांग्रेस को मिली थीं सिर्फ दो सीटें
2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा था. पार्टी को केवल 2.33 प्रतिशत वोट मिले और उसके 399 उम्मीदवारों में से 387 की जमानत जब्त हो गई थी.
कांग्रेस को फरेन्दा सीट से वीरेंद्र चौधरी और रामपुर खास सीट से आराधना मिश्रा ने जीत दिलाई थी. दूसरी ओर, सपा ने छोटे दलों के साथ गठबंधन कर 111 सीटों पर जीत हासिल की और विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल बनी.
इन नतीजों ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सामने संगठन और चुनावी प्रभाव बढ़ाने की चुनौती को भी उजागर किया.
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस की वापसी
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस ने एक बार फिर गठबंधन किया. उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से सपा ने 37 और कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं. दोनों दलों की कुल 43 सीटों की जीत ने राज्य में राजनीतिक समीकरणों को बदल दिया.
अब 2027 के विधानसभा चुनाव में दोनों दल इसी गठबंधन को आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहे हैं. सीटों का बंटवारा, उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के बीच तालमेल गठबंधन की तैयारियों के अहम पहलू होंगे.
फिलहाल, सीटों की संख्या और सपा के चुनाव चिह्न पर कांग्रेस नेताओं को मैदान में उतारने के फॉर्मूले पर आधिकारिक मुहर लगना बाकी है. अंतिम स्थिति दोनों दलों की औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी.


