सामान्य तौर पर देशभर में विजयादशमी पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के राठ में यह परंपरा अलग है। यहां दशहरा नहीं, बल्कि दीपावली की अमावस्या की शाम रावण दहन होता है। 100 साल से ज्यादा पुरानी यह परंपरा आज भी जारी है।
106 साल पुरानी है परंपरा
बुंदेलखंड के राठ में रामलीला की शुरुआत वर्ष 1920 में सेठ हीरालाल अग्रवाल, धनीराम खेवारिया, महादेव बुधौलिया, उमाशंकर नगाइच, सकूर बेग, मंजूर बेग और विश्वनाथ नगाइच ने की थी। शुरुआती दौर में दशहरा के दिन ही रामलीला और रावण दहन होता था।
बाद में रामलीला मैदान में जलभराव के कारण दशहरा तक रावण दहन कराना मुश्किल होने लगा। इसके बाद बुजुर्गों के निर्णय पर वर्ष 1926 में पहली बार दीपावली की अमावस्या पर रावण दहन किया गया। धीरे-धीरे यही व्यवस्था राठ की स्थायी परंपरा बन गई।
जलभराव ने बदल दी पूरी परंपरा
राठ की भौगोलिक स्थिति के कारण बरसात का पानी रामलीला मैदान की ओर पहुंचता था। दशहरा तक मैदान में पानी जमा रहता था, जिससे वहां आयोजन करना संभव नहीं होता था।
इसी वजह से धनीराम खेवारिया ने अपने आवास पर भरत मिलाप का मंचन शुरू कराया था। बताया जाता है कि तब से आज तक भरत मिलाप उनके घर पर ही आयोजित होता आ रहा है।
शरद पूर्णिमा से शुरू होता है रामलीला मेला
राठ में करीब एक महीने तक चलने वाले रामलीला मेले की शुरुआत शरद पूर्णिमा पर शंकर जी की छोटी बरात के साथ होती है। इसके पांच दिन बाद भगवान श्रीराम की बड़ी बरात यानी भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है।
दीपावली की अमावस्या की शाम रामलीला मैदान में दस सिर वाले रावण के पुतले का दहन किया जाता है। इससे पहले श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का सजीव मंचन होता है और फिर रावण के पुतले को आग लगाई जाती है।
मुस्लिम कलाकार भी निभाते थे राम-लक्ष्मण का किरदार
राठ की रामलीला केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि यहां की गंगा-जमुनी तहजीब की भी मिसाल रही है। पुराने समय में स्थानीय लोग ही राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न समेत दूसरे पात्रों की भूमिका निभाते थे।
इनमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी रामलीला के अलग-अलग किरदार निभाते थे। अब रामलीला का मंचन श्री गिरिराज आदर्श रामलीला मंडल, वृंदावन धाम, मथुरा की ओर से किया जाता है।
KBC में भी पूछा गया था राठ से जुड़ा सवाल
राठ की यह अनोखी परंपरा कौन बनेगा करोड़पति में भी चर्चा में आ चुकी है। वर्ष 2019 में KBC के सीजन-11 में सवाल पूछा गया था कि भारत में रावण दहन सबसे बाद में कहां होता है। इसके जवाब में हमीरपुर जिले के राठ का नाम सामने आया था।
यही वजह है कि दीपावली पर होने वाला रावण दहन राठ की सबसे खास और देशभर में चर्चित परंपराओं में शामिल है।


